Indigo का दबदबा: जून में 66.3% मार्केट शेयर के साथ उड़ान भरी


देश के तेजी से बढ़ते एविएशन सेक्टर में इंडिगो एयरलाइंस ने अपनी बादशाहत को और अधिक मजबूती प्रदान की है। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) द्वारा जारी नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, जून के महीने में इंडिगो ने 66.3% की बाजार हिस्सेदारी हासिल कर ली है, जो कंपनी के इतिहास का अब तक का सबसे बेहतरीन प्रदर्शन…

भारतीय एविएशन मार्केट पर इंडिगो का दबदबा: जून में हासिल किया 66.3% का रिकॉर्ड मार्केट शेयर

देश के तेजी से बढ़ते एविएशन सेक्टर में इंडिगो एयरलाइंस ने अपनी बादशाहत को और अधिक मजबूती प्रदान की है। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) द्वारा जारी नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, जून के महीने में इंडिगो ने 66.3% की बाजार हिस्सेदारी हासिल कर ली है, जो कंपनी के इतिहास का अब तक का सबसे बेहतरीन प्रदर्शन है। बाजार के जानकारों का मानना है कि इंडिगो की यह बढ़त ऐसे समय में आई है जब टाटा समूह की एअर इंडिया ने अपने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय परिचालन में कटौती की है। अपनी इस अग्रणी स्थिति को भविष्य में भी सुरक्षित रखने के लिए इंडिगो ने एयरबस फ्लीट के विस्तार हेतु 1,000 से अधिक सीएफएम लीप (LEAP) इंजनों की खरीद के लिए एक ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं।

जून महीने में यात्रियों की संख्या और एअर इंडिया का प्रदर्शन

आंकड़ों पर गौर करें तो जून के दौरान इंडिगो ने कुल 89.2 लाख यात्रियों को उनकी मंजिल तक पहुंचाया। हालांकि यह आंकड़ा मई के 99 लाख और अप्रैल के 89.7 लाख यात्रियों की तुलना में थोड़ा कम है, लेकिन फिर भी इंडिगो अपने विशाल नेटवर्क और सुदृढ़ फ्लीट के दम पर नंबर वन बनी हुई है।

दूसरी ओर, टाटा समूह के स्वामित्व वाली एअर इंडिया के लिए जून का महीना काफी चुनौतीपूर्ण रहा। एयरलाइन ने जून में केवल 32 लाख यात्रियों को सेवाएं दीं, जो इस पूरे साल का सबसे निचला स्तर है। याद दिला दें कि इसी साल जनवरी में एअर इंडिया ने 40 लाख यात्रियों का आंकड़ा पार कर उच्च स्तर छुआ था।

एअर इंडिया को भारी वित्तीय नुकसान और भविष्य की रणनीति

वित्तीय मोर्चे पर एअर इंडिया की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। वित्त वर्ष 2024-25 में एयरलाइन ने 26,000 करोड़ रुपये से अधिक का भारी राजस्व घाटा दर्ज किया है। इस वित्तीय दबाव के कारण कंपनी ने अगस्त के अंत तक अपने नेटवर्क को युक्तिसंगत (Rationalization) बनाने और परिचालन को सीमित करने का निर्णय लिया है।

  • एअर इंडिया के चीफ कॉमर्शियल एंड ट्रांसफॉर्मेशन ऑफिसर निपुण अग्रवाल के अनुसार, एयरलाइन सितंबर से अपने सस्पेंड किए गए घरेलू और अंतरराष्ट्रीय रूटों को दोबारा बहाल करने की योजना पर काम कर रही है।
  • वर्तमान में विमानों की कमी के कारण शिकागो और वॉशिंगटन जैसे महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय मार्गों पर उड़ानों का संचालन फिलहाल स्थगित रहने की संभावना है।

अकासा एयर की शानदार उड़ान और मिडिल ईस्ट का प्रभाव

इस बीच, अकासा एयर ने भी अपने प्रदर्शन से सबको प्रभावित किया है। एयरलाइन ने जून में 6.4% का रिकॉर्ड मार्केट शेयर दर्ज किया है। कंपनी ने 92.2% का उच्चतम पैसेंजर लोड फैक्टर हासिल किया है। वर्तमान में अकासा एयर अपने परिचालन विस्तार के लिए 10,000 करोड़ रुपये जुटाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। वहीं, दूसरी ओर मिडिल ईस्ट में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव ने भारतीय एयरलाइंस की कमर तोड़ दी है। स्पाइसजेट और एअर इंडिया एक्सप्रेस जैसी कंपनियों की अंतरराष्ट्रीय क्षमता का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों में केंद्रित होने के कारण उन्हें अपनी उड़ानों में कटौती करनी पड़ी है।

इंडिगो और सीएफएम की ऐतिहासिक साझेदारी

इंडिगो ने अपनी विस्तार योजना के तहत सीएफएम इंटरनेशनल के साथ 510 एयरबस A320neo विमानों के लिए 1,000 से अधिक LEAP-1A इंजनों का बड़ा ऑर्डर दिया है।

  • सबसे बड़ा सिंगल ऑर्डर: यह सीएफएम के इतिहास में किसी एक एयरलाइन द्वारा दिया गया अब तक का सबसे बड़ा इंजन ऑर्डर है।
  • मेंटेनेंस हब: इस करार के तहत इंडिगो अपनी खुद की MRO (मेंटेनेंस, रिपेयर एंड ओवरहाल) फैसिलिटी भी विकसित करेगी, जिससे भविष्य में मरम्मत का खर्च कम होगा।
  • तकनीकी लाभ: LEAP इंजन ईंधन की खपत में 15-20% तक की कमी लाने और कार्बन उत्सर्जन को कम करने में सक्षम हैं।

भारत वर्तमान में सीएफएम के लिए तीसरा सबसे बड़ा बाजार बन चुका है, जहां पांच प्रमुख एयरलाइंस 400 से अधिक लीप-पावर्ड विमानों का संचालन कर रही हैं।

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