Weather: कोटा में मानसून सुस्त, अच्छी बारिश के लिए निकली घास भैरव की सवारी

राजस्थान के कोटा में मानसून की सुस्त चाल ने न केवल आम जनजीवन को प्रभावित किया है, बल्कि किसानों की चिंताएं भी बढ़ा दी हैं। लंबे समय से बारिश न होने के कारण शहर में उमस भरी गर्मी का प्रकोप बढ़ गया है। तापमान में लगातार हो रही बढ़ोतरी से लोग बेहाल हैं।

कोटा में मानसून की बेरुखी: अच्छी बारिश के लिए ‘घास भैरव’ का नगर भ्रमण, किसान चिंतित

राजस्थान के कोटा में मानसून की सुस्त चाल ने न केवल आम जनजीवन को प्रभावित किया है, बल्कि किसानों की चिंताएं भी बढ़ा दी हैं। लंबे समय से बारिश न होने के कारण शहर में उमस भरी गर्मी का प्रकोप बढ़ गया है। तापमान में लगातार हो रही बढ़ोतरी से लोग बेहाल हैं।

बारिश की कामना और इंद्र देव को प्रसन्न करने के लिए रविवार को कोटा के छावनी इलाके में एक अनोखी परंपरा देखने को मिली। कुम्हारों के मोहल्ले से ‘घास भैरव’ की शोभायात्रा निकाली गई। करीब 4.5 किलोमीटर लंबे इस नगर भ्रमण के दौरान स्थानीय व्यापारियों और महिलाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और पूजा-अर्चना कर क्षेत्र में अच्छी बारिश की प्रार्थना की।

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15 जुलाई के बाद मिल सकती है राहत

मौसम विभाग के अनुसार, वर्तमान में वेदर सिस्टम कमजोर पड़ने के कारण कोटा में मौसम पूरी तरह शुष्क बना हुआ है। हालांकि, मौसम विशेषज्ञों ने 15 जुलाई के बाद बारिश की संभावना जताई है। रविवार को कोटा का अधिकतम तापमान 36.1 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 28.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से अधिक है।

आंकड़ों में समझें बारिश की स्थिति

जिले में मानसून की स्थिति को लेकर जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस सीजन में अब तक बारिश का कोटा पूरा नहीं हो सका है।

विवरणआंकड़े
12 जुलाई तक औसत बारिश173.3 मिमी
अब तक हुई कुल बारिश142.7 मिमी
औसत से कमी18 प्रतिशत

खरीफ की बुवाई पर संकट

जुलाई का दूसरा सप्ताह बीतने को है, लेकिन पर्याप्त बारिश न होने के कारण खरीफ फसलों की बुवाई बुरी तरह प्रभावित हुई है। कृषि विभाग की रिपोर्ट के अनुसार:

  • कोटा संभाग में कुल बुवाई का लक्ष्य: 12.14 लाख हेक्टेयर
  • अब तक हुई बुवाई: 6.19 लाख हेक्टेयर (51.03%)
  • खाली पड़ा क्षेत्र: 5.81 लाख हेक्टेयर (लगभग 49%)

विशेषज्ञों का कहना है कि बारिश की कमी का सबसे बुरा असर सोयाबीन की फसल पर पड़ा है। यदि जल्द ही अच्छी बारिश नहीं हुई, तो कृषि क्षेत्र में बड़ा नुकसान हो सकता है। किसान अब भी आसमान की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं, उम्मीद है कि अगले कुछ दिनों में मानसून की सक्रियता से खेतों को जीवनदान मिलेगा।