झाबुआ में दुकानों के पुनर्निर्माण पर मचा घमासान: व्यापारियों ने किया चक्काजाम, शहर रहा पूरी तरह बंद
मध्य प्रदेश के झाबुआ शहर में नगर पालिका और व्यापारियों के बीच दुकानों के पुनर्निर्माण को लेकर उपजा विवाद अब गंभीर रूप ले चुका है। सोमवार को सकल व्यापारी संघ के आह्वान पर पूरे शहर में व्यावसायिक प्रतिष्ठान पूरी तरह बंद रहे। बस स्टैंड स्थित 13 जर्जर दुकानों को गिराने और उनके पुनर्निर्माण की प्रक्रिया को लेकर व्यापारियों ने अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया है।
इन क्षेत्रों में पसरा रहा सन्नाटा
बंद के चलते शहर के मुख्य व्यापारिक केंद्रों पर दिनभर सन्नाटा पसरा रहा। दुकानदारों ने अपने प्रतिष्ठान बंद रखकर प्रशासन के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर की। प्रभावित क्षेत्रों की सूची नीचे दी गई है:
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- बस स्टैंड और उसके आसपास का पूरा इलाका।
- हॉस्पिटल रोड और चंद्रशेखर आजाद मार्ग।
- राजवाड़ा चौक और राजगढ़ नाका।
हालांकि, आम जनता की परेशानी को देखते हुए मेडिकल और दूध जैसी आवश्यक सेवाओं को बंद से मुक्त रखा गया था, जिससे लोगों को थोड़ी राहत मिली।
PPP मॉडल पर व्यापारियों की कड़ी आपत्ति
विवाद की मुख्य जड़ नगर पालिका द्वारा पुनर्निर्माण में अपनाए जा रहे पीपीपी (PPP) मॉडल को माना जा रहा है। व्यापारियों का आरोप है कि नगर पालिका ने शुरुआत में उन्हें दुकानें वापस देने का आश्वासन दिया था, लेकिन अब अनुबंध की शर्तों में बदलाव कर उन्हें बेदखल करने की कोशिश की जा रही है। व्यापारियों का कहना है कि इस फैसले से उनके भविष्य पर अनिश्चितता के बादल छा गए हैं। विरोध प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में व्यापारी राजवाड़ा चौक पर एकजुट हुए, जिन्हें नगर पालिका उपाध्यक्ष लाखनसिंह सोलंकी का भी समर्थन प्राप्त हुआ।
प्रशासन का पक्ष और भविष्य की राह
विवाद के बीच रविवार देर शाम नगर पालिका अध्यक्ष कविता सिंगार और राजस्व सभापति विजय चौहान ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर स्थिति स्पष्ट करने का प्रयास किया। प्रशासन का पक्ष रखते हुए विजय चौहान ने कहा कि व्यापारियों के साथ कई दौर की वार्ता हो चुकी है और जर्जर दुकानों को हटाना सुरक्षा के लिहाज से जरूरी है। वहीं, नगर पालिका अध्यक्ष ने व्यापारियों से किसी के बहकावे में न आने और विकास कार्यों में सहयोग करने की अपील की है।
| पक्ष | मुख्य मांग/तर्क |
|---|---|
| व्यापारी | पुरानी शर्तों के अनुसार दुकानें वापस मिलें, पीपीपी मॉडल मंजूर नहीं। |
| नगर पालिका | जर्जर ढांचों को हटाना अनिवार्य, विकास के लिए पुनर्निर्माण जरूरी। |
फिलहाल, सोमवार को हुआ सफल बंद यह संकेत दे रहा है कि व्यापारी अपनी मांगों से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। अब सबकी निगाहें प्रशासन और व्यापारिक संघ के बीच होने वाली अगली बैठक पर टिकी हैं, जिससे इस गतिरोध का कोई ठोस समाधान निकल सके।










