अयोध्या में योगी के ड्रीम प्रोजेक्ट पर लापरवाही का ग्रहण: सरयू में फेंका गया निर्माण कार्य का मलबा, श्रद्धालुओं की जान पर खतरा
सतीश सिंह, अयोध्या। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ड्रीम प्रोजेक्ट के तहत अयोध्या को विश्वस्तरीय शहर बनाने का संकल्प लिया गया है, लेकिन धरातल पर विकास कार्यों की गुणवत्ता पर बड़े सवाल उठ रहे हैं। रामनगरी को ‘दिव्य और भव्य’ स्वरूप देने की कोशिशों के बीच गुप्तार घाट के सौंदर्यीकरण में भारी लापरवाही सामने आई है। करीब 3.67 करोड़ रुपये की लागत से चल रहे इस निर्माण कार्य के दौरान निकले पत्थरों और मलबे को सीधे सरयू नदी में प्रवाहित करने का गंभीर आरोप लगा है, जिससे नदी में स्नान करने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा खतरे में पड़ गई है।
तीर्थ विकास परिषद और यूपीपीसीएल की देखरेख में प्रभात कंस्ट्रक्शन द्वारा गुप्तार घाट पर पत्थर लगाने और सौंदर्यीकरण का काम किया जा रहा है। हालांकि, कार्य अंतिम चरण में है, लेकिन स्थानीय निवासियों का कहना है कि ठेकेदार ने निर्माण के बाद बचे नुकीले पत्थर और मलबे को हटाने के बजाय नदी में डाल दिया। घाट के किनारों पर फैले इन पत्थरों के कारण कई श्रद्धालु स्नान करते समय फिसलकर चोटिल हो चुके हैं।
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| परियोजना | गुप्तार घाट सौंदर्यीकरण |
| कुल लागत | 3.67 करोड़ रुपये |
| मुख्य समस्या | निर्माण कार्य का मलबा सरयू नदी में डालना |
| प्रभाव | श्रद्धालुओं के लिए दुर्घटना का खतरा |
पानी में छिपा मलबा बना ‘काल’, प्रशासन हुआ सक्रिय
स्थिति तब और भी खतरनाक हो गई है जब सरयू नदी का जलस्तर बढ़ने से यह मलबा पानी के नीचे छिप गया है। बाहर से आने वाले हजारों श्रद्धालुओं को पानी के भीतर मौजूद इन नुकीले पत्थरों का अंदाजा नहीं है, जिससे किसी भी समय बड़ी दुर्घटना हो सकती है। ग्रामीणों ने कई बार शिकायतें की, लेकिन मलबे को नहीं हटाया गया। मामला तूल पकड़ने के बाद प्रशासन हरकत में आया है। यूपीपीसीएल के अधिकारी मनोज शर्मा ने बताया कि शिकायत के बाद जूनियर इंजीनियर (जेई) को मौके पर भेजा गया है और मलबे को तत्काल हटाने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस लापरवाही के दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
विकास की गुणवत्ता पर उठे सवाल
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं अयोध्या के विकास कार्यों की लगातार निगरानी कर रहे हैं और श्रद्धालुओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हैं। ऐसे में करोड़ों की परियोजना में सामने आई यह लापरवाही सरकारी मानकों पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा करती है। स्थानीय लोगों ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि इस मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और ठेकेदार के साथ-साथ जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि रामनगरी में विकास के नाम पर आस्था और सुरक्षा से खिलवाड़ न हो सके।
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