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सोलर इंडस्ट्री को बड़ी राहत: सरकार ने DCR नियम में दी 6 महीने की ढील
देश की सोलर इंडस्ट्री के लिए केंद्र सरकार ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण और राहत भरा फैसला लिया है। नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) ने डोमेस्टिक कंटेंट रिक्वायरमेंट (DCR) यानी भारत में निर्मित सोलर सेल वाले मॉड्यूल की अनिवार्यता में छह महीने की मोहलत देने का ऐलान किया है। इस निर्णय से उन हजारों प्रोजेक्ट्स को फिर से गति मिलने की उम्मीद है, जो सरकारी नियमों की सख्ती के कारण ठप पड़े थे।
उल्लेखनीय है कि सरकार ने 1 जून 2026 से एक कड़ा नियम लागू किया था, जिसके तहत केवल एएलएमएम (ALMM – अप्रूव्ड लिस्ट ऑफ मॉडल्स एंड मैन्युफैक्चरर्स) में शामिल सोलर मॉड्यूल से बने प्रोजेक्ट्स को ही ग्रिड कनेक्शन देने का प्रावधान किया गया था। इस नीति के लागू होते ही देशभर में रूफटॉप और ओपन एक्सेस सोलर प्रोजेक्ट्स का काम बुरी तरह प्रभावित हुआ था।
मंत्रालय द्वारा जारी नवीनतम आदेश के अनुसार, अब 31 दिसंबर 2026 तक नेट मीटरिंग और ओपन एक्सेस सोलर प्रोजेक्ट्स को नॉन-डीसीआर (Non-DCR) मॉड्यूल के साथ भी कमीशन करने की अनुमति दे दी गई है। इस छूट से कंपनियों और उपभोक्ताओं को अपने पुराने स्टॉक का उपयोग करने और अटके हुए कार्यों को पूरा करने का पर्याप्त समय मिल गया है। राजस्थान सोलर एसोसिएशन ने इस कदम का स्वागत करते हुए इसे इंडस्ट्री के लिए संजीवनी बताया है।
नियमों में बदलाव: एक नजर
| विवरण | महत्वपूर्ण जानकारी |
|---|---|
| पुरानी स्थिति | 1 जून 2026 से ALMM नियम अनिवार्य, सिर्फ DCR मॉड्यूल को मंजूरी। |
| नई राहत | 31 दिसंबर 2026 तक नॉन-DCR मॉड्यूल के इस्तेमाल की छूट। |
| प्रभाव | नेट मीटरिंग और ओपन एक्सेस प्रोजेक्ट्स को फिर से शुरू करने की अनुमति। |
| भविष्य | 1 जनवरी 2027 से ALMM नियम पुनः पूर्णतः प्रभावी होगा। |
इंडस्ट्री की चुनौतियां और लागत का संकट
राजस्थान सोलर एसोसिएशन के सीईओ नितिन अग्रवाल ने बताया कि सरकार का यह निर्णय स्वागत योग्य है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि देश में सोलर सेल का उत्पादन अभी भी मांग के मुकाबले काफी कम है। डीसीआर मॉड्यूल की अनिवार्यता के कारण बाजार में इनकी भारी कमी हो गई थी, जिससे कीमतों में बेतहाशा वृद्धि देखी गई।
- कीमतों में उछाल: नॉन-डीसीआर मॉड्यूल जहां 15-16 रुपए प्रति वाट मिल रहे थे, वहीं डीसीआर मॉड्यूल की कीमत 30-32 रुपए प्रति वाट तक पहुंच गई थी।
- आम आदमी पर असर: प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के लाभार्थियों के लिए 3 किलोवाट का सिस्टम करीब 35 से 40 हजार रुपए तक महंगा हो गया था।
- राजस्थान में प्रभाव: प्रदेश के करीब 2200 पंजीकृत वेंडर्स में से हजारों के प्रोजेक्ट मॉड्यूल न मिलने के कारण बीच में ही रुक गए थे।
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार को इस छह महीने की राहत अवधि के दौरान सोलर सेल के घरेलू उत्पादन को बढ़ाने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह की आपूर्ति संबंधी समस्याओं से बचा जा सके और सोलर ऊर्जा के लक्ष्य को समयबद्ध तरीके से प्राप्त किया जा सके।










