Politics: दतिया में भाजपा को बड़ा झटका, नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटते ही पूरी टीम ने दिया इस्तीफा

मध्य प्रदेश की राजनीति में दतिया विधानसभा सीट का उपचुनाव इस समय चर्चा का केंद्र बना हुआ है। भारतीय जनता पार्टी ने जैसे ही इस सीट के लिए अपने प्रत्याशी के रूप में आशुतोष तिवारी के नाम की घोषणा की, वैसे ही पार्टी के भीतर भूचाल आ गया। पूर्व मंत्री और भाजपा के कद्दावर नेता…

दतिया में सियासी घमासान: टिकट बंटवारे से नाराज भाजपा की पूरी जिला इकाई ने दिया इस्तीफा

मध्य प्रदेश की राजनीति में दतिया विधानसभा सीट का उपचुनाव इस समय चर्चा का केंद्र बना हुआ है। भारतीय जनता पार्टी ने जैसे ही इस सीट के लिए अपने प्रत्याशी के रूप में आशुतोष तिवारी के नाम की घोषणा की, वैसे ही पार्टी के भीतर भूचाल आ गया। पूर्व मंत्री और भाजपा के कद्दावर नेता नरोत्तम मिश्रा को दरकिनार किए जाने से नाराज दतिया जिला भाजपा इकाई ने बगावत का झंडा बुलंद कर दिया है। इस विरोध के चलते पार्टी के जिला अध्यक्ष रघुवीर सरण सहित तमाम बड़े पदाधिकारियों ने सामूहिक इस्तीफे की पेशकश कर दी है, जो भाजपा आलाकमान के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है।

दतिया में उपजे इस असंतोष की आग केवल जिला कार्यालय तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बूथ स्तर तक फैल चुकी है। इस्तीफा देने वालों में केवल बड़े पदाधिकारी ही नहीं, बल्कि दतिया विधानसभा के अंतर्गत आने वाले 6 मंडलों के अध्यक्ष, सभी मोर्चा अध्यक्ष, नगर पालिका अध्यक्ष-उपाध्यक्ष, जनपद अध्यक्ष और 291 बूथों के अध्यक्ष व उनकी पूरी कार्यकारिणी शामिल है। इतने बड़े पैमाने पर इस्तीफों का दौर बताता है कि जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं में नरोत्तम मिश्रा की अनदेखी को लेकर कितना गहरा आक्रोश है।

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आलाकमान को 24 घंटे का अल्टीमेटम

पार्टी की कार्यप्रणाली से खफा दतिया भाजपा के पदाधिकारियों ने दिल्ली और भोपाल स्थित केंद्रीय नेतृत्व को सख्त संदेश भेजा है। उन्होंने पार्टी आलाकमान को स्पष्ट रूप से 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि पार्टी ने अपने निर्णय पर पुनर्विचार नहीं किया और नरोत्तम मिश्रा को प्रत्याशी घोषित नहीं किया, तो वे न केवल अपने पदों से इस्तीफा देंगे, बल्कि भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से भी पूरी तरह नाता तोड़ लेंगे। इस चेतावनी ने राज्य की सियासत में हलचल पैदा कर दी है।

इस्तीफा देने वालों की फेहरिस्त लंबी

दतिया में भाजपा के संगठनात्मक ढांचे को बड़ा झटका लगा है। सामूहिक इस्तीफे की इस कड़ी में निम्नलिखित पदों पर आसीन नेताओं और पदाधिकारियों ने अपने पदों से त्यागपत्र देने का निर्णय लिया है:

  • जिला अध्यक्ष और समस्त जिला पदाधिकारी।
  • जिला पंचायत अध्यक्ष एवं जनपद अध्यक्ष।
  • नगर पालिका दतिया के अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष
  • बड़ौनी पंचायत के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष।
  • दतिया विधानसभा के सभी 6 मंडलों के अध्यक्ष
  • सभी मोर्चा अध्यक्ष और पार्षदगण।
  • दतिया विधानसभा क्षेत्र के सभी 291 बूथों के अध्यक्ष एवं उनकी कार्यकारिणी।

टिकट की उम्मीद और नामांकन की तैयारी

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि नरोत्तम मिश्रा इस सीट से सबसे प्रबल दावेदार माने जा रहे थे। राजेंद्र भारती को बैंक फ्रॉड केस में सजा होने के बाद जैसे ही उपचुनाव की स्थितियां बनीं, नरोत्तम मिश्रा का नाम सबसे ऊपर उभरकर सामने आया था। सूत्रों के अनुसार, नरोत्तम मिश्रा को स्वयं भी टिकट मिलने की पूरी उम्मीद थी, जिसके चलते उन्होंने चुनाव लड़ने के लिए नामांकन फॉर्म तक खरीद लिया था। ऐन वक्त पर आशुतोष तिवारी को टिकट दिए जाने के निर्णय ने न केवल पूर्व मंत्री के समर्थकों को चौंकाया, बल्कि उन्हें अपमानित महसूस कराया है।

कौन हैं आशुतोष तिवारी?

भाजपा द्वारा अचानक मैदान में उतारे गए आशुतोष तिवारी को लेकर स्थानीय स्तर पर काफी उत्सुकता और सवाल उठ रहे हैं। पार्टी ने एक नए चेहरे पर दांव लगाकर यह संकेत देने की कोशिश की है कि वे संगठन में बदलाव और नई ऊर्जा के पक्ष में हैं। हालांकि, इस प्रयोग की कीमत पार्टी को अपने पुराने वफादार कार्यकर्ताओं को खोकर चुकानी पड़ रही है। आशुतोष तिवारी की उम्मीदवारी को लेकर स्थानीय कार्यकर्ताओं का तर्क है कि वे क्षेत्र की नब्ज से उस तरह वाकिफ नहीं हैं, जिस तरह पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा दशकों से रहे हैं।

आने वाले 24 घंटे दतिया की राजनीति के लिए बेहद निर्णायक साबित होने वाले हैं। क्या भाजपा आलाकमान अपनी जिद पर अड़ा रहेगा या फिर दतिया के कार्यकर्ताओं की नाराजगी को देखते हुए कोई बीच का रास्ता निकालेगा? यह देखना दिलचस्प होगा। फिलहाल, दतिया में भाजपा का संगठन पूरी तरह से बिखरता हुआ दिखाई दे रहा है, जिसका सीधा फायदा विपक्षी दलों को मिल सकता है।