Jodhpur: जजों के निरीक्षण में पकड़ी गई फर्जी बसों की पोल

यात्रियों की सुरक्षा को ताक पर रखकर सड़कों पर दौड़ रही अवैध और नियमों के विरुद्ध मॉडिफाइड बसों पर जोधपुर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने अब तक का सबसे बड़ा एक्शन लिया है। मंगलवार देर रात जिला न्यायालय के न्यायाधीशों ने स्वयं सड़कों पर उतरकर लग्जरी, एसी और स्लीपर बसों के खिलाफ एक मेगा सर्च…

जोधपुर में अवैध बसों के खिलाफ न्यायिक कार्रवाई: 7 बसें सीज, एक ही नंबर पर चल रही थी दो गाड़ियां

यात्रियों की सुरक्षा को ताक पर रखकर सड़कों पर दौड़ रही अवैध और नियमों के विरुद्ध मॉडिफाइड बसों पर जोधपुर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने अब तक का सबसे बड़ा एक्शन लिया है। मंगलवार देर रात जिला न्यायालय के न्यायाधीशों ने स्वयं सड़कों पर उतरकर लग्जरी, एसी और स्लीपर बसों के खिलाफ एक मेगा सर्च ऑपरेशन चलाया। हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद शुरू हुए इस अभियान के तहत कायलाना चौराहा समेत शहर के कई इलाकों में नाकाबंदी की गई। इस कार्रवाई में भारी अनियमितताएं पाए जाने पर 7 बसों को मौके पर ही सीज कर दिया गया, वहीं कई बस ऑपरेटरों पर भारी जुर्माना लगाते हुए मोटर वाहन अधिनियम के तहत मुकदमे दर्ज किए गए हैं।

एक ही नंबर पर दौड़ रही थीं दो बसें, फर्जीवाड़े का खुलासा

देर रात जब जांच टीम कायलाना चौराहे पर पहुंची, तो वहां धोखाधड़ी का एक हैरान करने वाला मामला सामने आया। टीम को देखकर एक बस ऑपरेटर ने हड़बड़ी में आगे की नंबर प्लेट हटा दी। जब अधिकारियों ने सख्ती से पूछताछ की, तो पता चला कि एक ही नंबर से दो बसें चलाई जा रही थीं। पकड़ी गई बस पर फर्जी नंबर प्लेट लगी थी और उसके चेसिस नंबर के साथ भी छेड़छाड़ की गई थी। इसके अलावा, प्रतापनगर सदर और देवनगर थाना क्षेत्रों में भी एक ही नंबर की दो बसें संचालित होती पाई गईं।

न्यायिक अधिकारियों की सीधी निगरानी में हो रहा एक्शन

यह पूरी कार्रवाई जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष दिनेश त्यागी और जोधपुर जिला अध्यक्ष पूरण कुमार शर्मा के निर्देशन में की जा रही है। अपर एवं सेशन न्यायाधीश और प्राधिकरण के सचिव डॉ. मनीष हरजाई ने बताया कि रालसा (RALSA) के निर्देशों के तहत लगातार बसों की लंबाई, सुरक्षा उपकरणों और अन्य तकनीकी मानकों की जांच की जा रही है। किसी भी प्रकार की कमी पाए जाने पर तुरंत सीज करने की कार्रवाई की जा रही है।

यात्रियों के लिए सुरक्षा संबंधी निर्देश

न्यायाधीश डॉ. मनीष हरजाई ने आमजन से अपील की है कि वे यात्रा के दौरान अपने अधिकारों के प्रति सचेत रहें। उन्होंने सलाह दी है कि यात्री बस में बैठने से पहले निम्नलिखित सुरक्षा पहलुओं की जांच अवश्य करें:

  • बस में आपातकालीन निकास (इमरजेंसी गेट) की स्थिति क्या है?
  • क्या बस पलटने की स्थिति में छत पर निकलने का रास्ता उपलब्ध है?
  • सुरक्षा उपकरणों की मौजूदगी सुनिश्चित करें।

यदि किसी यात्री को बस ऑपरेटर या ट्रैवल कंपनी से कोई परेशानी होती है, तो वे स्थाई लोक अदालत में आवेदन कर सकते हैं।

अभियान की मुख्य विशेषताएं और बस ऑपरेटरों की धांधली

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव राकेश रामावत ने बताया कि फलोदी और दौसा बस हादसों के बाद सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट ने कड़ा संज्ञान लिया था। जांच में बसों में कई गंभीर तकनीकी खामियां सामने आई हैं:

खामी का प्रकारसुरक्षा पर प्रभाव
इमरजेंसी एग्जिट काटनाआपात स्थिति में बाहर निकलना असंभव
चेसिस काटकर लंबाई बढ़ानाबस का संतुलन बिगड़ना (रियर ओवरहैंगिंग)
डिक्की का आकार बढ़ानावाहन की स्टेबिलिटी में कमी

47 बसें अब तक सीज, उत्तर-पूर्व राज्यों से है फर्जीवाड़ा का कनेक्शन

आरटीओ इंस्पेक्टर पुष्पेंद्र सिंह और फिरोज ने बताया कि 8 जुलाई से चल रहे इस अभियान में अब तक 47 बसों को सीज किया जा चुका है। इनमें से 90 प्रतिशत से अधिक बसें अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड जैसे उत्तर-पूर्वी राज्यों में पंजीकृत हैं। पहले इन ऑपरेटरों को हिदायत देकर चालान काटा गया था, लेकिन नियमों में सुधार न करने के कारण अब सख्त कार्रवाई की जा रही है।