रायपुर में क्रिकेटरों के लिए एंटी-डोपिंग सेमिनार: अनजाने में होने वाली डोपिंग से बचने के गुर सिखाए गए
खेल के मैदान पर बेहतर प्रदर्शन के लिए खिलाड़ी अक्सर डॉक्टर या ट्रेनर के परामर्श पर विभिन्न दवाओं और न्यूट्रिशन सप्लीमेंट्स का सेवन करते हैं। हालांकि, कई बार इन सप्लीमेंट्स में मौजूद प्रतिबंधित तत्व खिलाड़ियों को अनजाने में ही डोपिंग के गंभीर मामले में फंसा देते हैं। इसी जोखिम को देखते हुए खिलाड़ियों को जागरूक करने का प्रयास किया गया है।
छत्तीसगढ़ स्टेट क्रिकेट संघ (CSCS) की ओर से मंगलवार को रायपुर के होटल मैरियट में एक महत्वपूर्ण एंटी-डोपिंग सेमिनार का आयोजन किया गया। इस सत्र का मुख्य उद्देश्य खिलाड़ियों को खेल के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में विस्तार से जानकारी देना था।
इस सेमिनार में राष्ट्रीय डोपिंग रोधी एजेंसी (NADA) की विशेषज्ञ डॉ. नेहा सिंह ने शिरकत की। उन्होंने लगभग 200 खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ को एंटी-डोपिंग नियमों की बारीकियां समझाईं। इस कार्यक्रम में पुरुष और महिला वर्ग के विभिन्न आयु समूहों के खिलाड़ी बड़ी संख्या में शामिल हुए।
डॉ. नेहा सिंह ने स्पष्ट किया कि कौन-सी दवाएं और सप्लीमेंट्स डोपिंग के दायरे में आते हैं। उन्होंने खिलाड़ियों को सलाह दी कि किसी भी दवा का सेवन करने से पहले उसकी पूरी जांच करना अनिवार्य है और किन सुरक्षा मानकों का पालन करना उनके करियर के लिए जरूरी है।
सप्लीमेंट का सेवन है सबसे बड़ा जोखिम
NADA के मानकों के अनुसार, बाजार में उपलब्ध कोई भी न्यूट्रिशन सप्लीमेंट 100% सुरक्षित नहीं होता। अक्सर सप्लीमेंट्स की गलत लेबलिंग या उनमें प्रतिबंधित पदार्थों की मिलावट के मामले सामने आते हैं।
- एंटी-डोपिंग नियमों में स्ट्रिक्ट लाइबिलिटी (सख्त जिम्मेदारी) का सिद्धांत लागू होता है।
- खिलाड़ी के शरीर में प्रतिबंधित पदार्थ मिलने पर पूरी जवाबदेही उसी खिलाड़ी की होती है।
- अनजाने में सेवन करना भी डोपिंग नियमों के उल्लंघन के रूप में ही देखा जाता है।
जागरूकता क्यों है जरूरी?
NADA का मुख्य उद्देश्य खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ को एंटी-डोपिंग शिक्षा प्रदान करना है। इसमें प्रतिबंधित दवाओं की सूची, टेस्टिंग की प्रक्रिया, खिलाड़ियों के अधिकार और एक सुरक्षित खेल संस्कृति को बढ़ावा देना शामिल है।
दवा लेने से पहले करें जांच
सेमिनार के दौरान खिलाड़ियों को NADA के ‘नो योर मेडिसिन (KYM)’ प्लेटफॉर्म के बारे में बताया गया। इस डिजिटल माध्यम से खिलाड़ी किसी भी दवा की स्थिति की जांच कर सकते हैं। विशेषज्ञ ने यह भी आगाह किया कि आयुर्वेदिक और हर्बल उत्पादों के मामले में भी पूरी सावधानी बरतनी चाहिए, क्योंकि उनमें भी डोपिंग से जुड़े प्रतिबंधित तत्व हो सकते हैं।
क्रिकेट में बढ़ रही सतर्कता
यद्यपि क्रिकेट में डोपिंग के मामले अन्य खेलों की तुलना में कम सामने आते हैं, लेकिन राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती सख्ती को देखते हुए राज्य क्रिकेट संघ अब जमीनी स्तर से ही खिलाड़ियों को शिक्षित कर रहे हैं। इसका एकमात्र लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी प्रतिभाशाली खिलाड़ी जानकारी के अभाव में अपना करियर दांव पर न लगाए।










