अयोध्या में दानपात्र विवाद पर गरमाया सियासी माहौल: पोस्टर वॉर के बाद प्रशासन की बड़ी कार्रवाई
अयोध्या: राम मंदिर के दानपात्र से धन चोरी के मामले ने तूल पकड़ लिया है। इस मुद्दे पर अब अयोध्या में जुबानी जंग के साथ-साथ ‘पोस्टर वॉर’ शुरू हो गया है। विपक्षी दलों के आरोपों का जवाब देने के लिए शहर के विभिन्न हिस्सों में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के खिलाफ तीखे संदेश वाले बैनर और पोस्टर लगाए गए हैं।
इन विवादित पोस्टरों में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव की तस्वीरें लगाई गई थीं। पोस्टरों में सपा सरकार पर निशाना साधते हुए लिखा गया है— ‘मुलायम सरकार की असलियत: दिल में बाबर, मुंह में राम। अयोध्या में हनुमानगढ़ी पर कराई नमाज, सपाइयों को तब न आई लाज।’
प्रशासन ने हटवाए पोस्टर
शहर में जगह-जगह लगे इन पोस्टरों के कारण राजनीतिक सरगर्मी काफी बढ़ गई थी। सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन हरकत में आया और आनन-फानन में धर्म पथ समेत शहर के कई प्रमुख मार्गों से इन बैनर-पोस्टरों को हटवा दिया गया। कई जगहों पर पोस्टर फटे हुए और अधूरे नजर आए, जो प्रशासन की त्वरित कार्रवाई की पुष्टि करते हैं। पुलिस का कहना है कि सार्वजनिक स्थलों पर बिना अनुमति के लगाए गए किसी भी तरह के पोस्टर को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
राजनीतिक बहस के केंद्र में राम मंदिर दानपात्र
राम मंदिर दानपात्र से चोरी की घटना के बाद से ही अयोध्या की राजनीति में उबाल आया हुआ है। जहां एक ओर विपक्ष इस घटना को लेकर मंदिर प्रबंधन और सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहा है, वहीं दूसरी ओर सत्तापक्ष इसे विपक्ष की ओछी राजनीति और अवसरवाद करार दे रहा है।
| विवाद का कारण | पक्षों का रुख |
|---|---|
| राम मंदिर दानपात्र से धन चोरी | विपक्ष: सुरक्षा और प्रबंधन पर सवाल |
| पोस्टर वॉर | सत्तापक्ष: विपक्ष के ‘पाखंड’ का विरोध |
भले ही प्रशासन ने फिलहाल शहर की दीवारों से पोस्टर हटवा दिए हों, लेकिन इस मुद्दे पर जारी बयानबाजी और सियासी खींचतान थमने का नाम नहीं ले रही है। राम मंदिर दानपात्र का यह मामला अब राज्य की राजनीति में चर्चा का मुख्य केंद्र बना हुआ है।
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