मोबाइल गेमिंग का बदला ट्रेंड: अब ‘फ्री’ गेम्स से हटकर प्रतिस्पर्धी गेम्स पर दांव लगा रहे भारतीय खिलाड़ी
भारत में मोबाइल गेमिंग का परिदृश्य तेजी से बदल रहा है। ‘मिक्सी ग्लोबल इन्वेस्टमेंट्स’ की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय गेमर्स अब कैजुअल और मुफ्त गेम्स के बजाय शूटर और स्ट्रैटजी जैसे प्रतिस्पर्धी गेम्स की ओर आकर्षित हो रहे हैं। रियल मनी गेमिंग (RMG) यानी सट्टा आधारित गेम्स पर सरकार की सख्ती के बाद, गेमर्स का रुझान पूरी तरह से नॉन-आरएमजी (Non-RMG) गेमिंग की ओर मुड़ गया है, जिससे इन-एप खरीदारी (In-App Purchases) में भारी उछाल देखने को मिल रहा है।
बाजार का तेजी से बढ़ता ग्राफ
रिपोर्ट के मुताबिक, नॉन-आरएमजी गेमिंग बाजार साल 2025 में 10,527 करोड़ रुपये का था, जो इस साल बढ़कर 14,350 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह रफ्तार जारी रही तो 2029 तक यह आंकड़ा 23,000 करोड़ रुपये को पार कर जाएगा। भारत में वर्तमान में 60 करोड़ सक्रिय गेमर्स हैं, जो दुनिया में सबसे बड़े बाजारों में से एक है।
गेमिंग कैटेगरी और कमाई की विकास दर
भारतीय गेमिंग बाजार में विभिन्न श्रेणियों की ग्रोथ रेट नीचे दी गई तालिका में देखी जा सकती है:
| गेम कैटेगरी | आय वृद्धि दर |
|---|---|
| एमओबीए (MOBA) | 234% |
| कार्ड बैटलर | 92% |
| 4X स्ट्रैटजी | 77% |
शूटर गेम्स का दबदबा
भले ही डाउनलोड के मामले में सिमुलेशन और आर्केड गेम्स आगे हैं, लेकिन कमाई के मामले में ‘शूटर गेम्स’ का कोई मुकाबला नहीं है। भारतीय बाजार में शूटर कैटेगरी की कुल कमाई में 94% हिस्सेदारी केवल दो बड़े गेम्स—फ्री फायर मैक्स और बैटलग्राउंड्स मोबाइल इंडिया (BGMI) की है। गेमर्स अब बेहतर ग्राफिक्स और हाई-एंड एक्सपीरियंस की मांग कर रहे हैं, जिससे स्नाइपर गेम्स भारत में सबसे तेजी से उभरती कैटेगरी बन गए हैं।
स्थानीयकरण और भविष्य की संभावनाएं
- सांस्कृतिक जुड़ाव: लूडो किंग और क्रिकेट लीग जैसे स्थानीय गेम्स अपनी थीम और भाषा के कारण ग्लोबल गेम्स को पीछे छोड़ रहे हैं।
- इन-एप खरीदारी: पिछले पांच वर्षों में इन-एप खरीदारी से होने वाली कमाई दोगुनी से अधिक बढ़कर 7,656 करोड़ रुपये हो गई है।
- विज्ञापन से कमाई: साल 2025 में इन-गेम विज्ञापनों के जरिए कंपनियों ने 2,871 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया है।
सामान्य गेम बनाम रियल मनी गेमिंग: अंतर समझें
अक्सर लोग सामान्य गेमिंग और सट्टा आधारित गेमिंग में उलझ जाते हैं। इसे समझना जरूरी है:
सामान्य गेमिंग: शूटर, स्ट्रैटजी और आर्केड जैसे गेम्स पूरी तरह से खिलाड़ी की स्किल और रणनीति पर आधारित होते हैं। इसमें किया गया खर्च केवल गेम के अंदर हथियारों, कैरेक्टर्स या लेवल अनलॉक करने के लिए होता है। इसमें पैसा जीतने का कोई दावा नहीं किया जाता।
रियल मनी गेमिंग (RMG): इसमें खिलाड़ी असली पैसा दांव पर लगाते हैं और खेल के नतीजे के आधार पर पैसे हारते या जीतते हैं। भारत सरकार ने इस श्रेणी पर साल 2025 में सख्त नियम लागू किए हैं।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर, भारतीय गेमिंग मार्केट का भविष्य बेहद उज्ज्वल है। साल 2026 तक पूरे गेमिंग मार्केट (RMG मिलाकर) के 48,000 करोड़ रुपये और 2031 तक 94,000 करोड़ रुपये से अधिक होने का अनुमान है। स्टार्टअप्स और बड़ी गेमिंग कंपनियों के लिए यह एक सुनहरा दौर साबित हो रहा है, जहां तकनीक और स्थानीय कंटेंट का संगम गेमिंग के नए आयाम लिख रहा है।









