बुरहानपुर: पांगरी बांध परियोजना के खिलाफ किसानों का ‘अंधेरा भगाओ’ आंदोलन, मुआवजे के लिए दी चेतावनी
मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले में पांगरी बांध परियोजना के प्रभावित किसान अब आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं। सोमवार की रात पांगरी, बसाली और नागझिरी सहित चार फालियों के सैकड़ों ग्रामीणों ने ‘अंधेरा भगाओ आंदोलन’ के तहत कैंडल मार्च निकालकर सरकार के खिलाफ अपना रोष व्यक्त किया। पिछले ढाई महीनों से बिजली संकट और मुआवजे के इंतजार में बैठे इन किसानों ने प्रशासन को साफ चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो आंदोलन को और अधिक उग्र किया जाएगा।
मुआवजे के बिना अधर में लटका भविष्य
किसान नेता डॉ. रवि कुमार पटेल ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि परियोजना का निर्माण कार्य बीते 29 मार्च से शुरू हो चुका है, लेकिन विस्थापित परिवारों को अब तक एक रुपया भी मुआवजा नहीं मिला है। किसानों का कहना है कि सरकार परियोजना के काम को तो तेजी से आगे बढ़ा रही है, लेकिन उन परिवारों की सुध नहीं ले रही है जिनकी जमीनें इस बांध की भेंट चढ़ गई हैं।
आंदोलन के प्रमुख बिंदु:
- बिजली संकट: मदन फाल्या सहित कई बस्तियों में पिछले 60 दिनों से बिजली गुल है, जिससे बच्चों की पढ़ाई और दैनिक जीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त है।
- मुआवजे की मांग: 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून के तहत बाजार मूल्य का दो से चार गुना मुआवजा तुरंत जारी किया जाए।
- 60 दिन का अल्टीमेटम: किसानों ने प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि दो महीने के भीतर मुआवजा नहीं मिला, तो वे बड़े पैमाने पर उग्र आंदोलन करेंगे।
पांगरी बांध परियोजना: एक नजर में
सरकार की इस महत्वाकांक्षी परियोजना का उद्देश्य सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करना है, लेकिन इसके क्रियान्वयन में हो रही देरी किसानों के लिए मुसीबत का सबब बन गई है।
| विवरण | आंकड़े |
|---|---|
| परियोजना की कुल लागत | 112.50 करोड़ रुपये |
| सिंचाई क्षमता | 5164 हेक्टेयर भूमि |
| जलभराव क्षमता | 18.20 मिलियन घन मीटर |
| प्रभावित किसान | 3280 से अधिक |
कानूनी अधिकारों की अनदेखी का आरोप
प्रदर्शनकारी किसानों का कहना है कि सरकार भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन कानून-2013 के प्रावधानों की अनदेखी कर रही है। जिन किसानों की कृषि भूमि डूब क्षेत्र में चली गई है, उनके पास आय का कोई अन्य साधन नहीं बचा है। ऐसे में बिना मुआवजे के जीवन यापन करना उनके लिए कठिन हो गया है।
सोमवार रात के इस प्रदर्शन में नंदू पटेल, संजय चौकसे, माधो नाटो और बद्री वास्कले जैसे स्थानीय नेताओं ने हिस्सा लिया। किसानों ने दो टूक शब्दों में कहा है कि अब वे आश्वासन नहीं, बल्कि सीधे अपने खातों में मुआवजे की राशि देखना चाहते हैं। फिलहाल, प्रशासन की ओर से इस मामले में कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं आई है, जिससे किसानों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है।








