आगर-मालवा में ऑटो और टैक्सी चालकों का प्रदर्शन, फिटनेस सेंटर नहीं होने से बढ़ी मुश्किलें
आगर-मालवा जिले में सोमवार को परिवहन व्यवस्था की लचर स्थिति के खिलाफ ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों का गुस्सा फूट पड़ा। बड़ी संख्या में वाहन चालकों ने एकजुट होकर रैली निकाली और अपनी मांगों को लेकर जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपा। चालकों का आरोप है कि पिछले छह महीनों से जिला परिवहन कार्यालय में फिटनेस प्रमाण-पत्र बनाने की सेवा पूरी तरह ठप पड़ी है, जिससे उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
फिटनेस सेवा बंद, फिर भी कट रहे चालान
प्रदर्शनकारी चालकों का कहना है कि जब विभाग फिटनेस प्रमाण-पत्र जारी ही नहीं कर रहा है, तो बिना फिटनेस वाले वाहनों पर लगातार चालानी कार्रवाई करना पूरी तरह से अनुचित है। चालकों ने बताया कि परिवहन विभाग के अधिकारियों ने पूर्व में उच्च स्तरीय निर्देशों का हवाला देकर जल्द व्यवस्था सुधारने का आश्वासन दिया था, लेकिन आज तक स्थिति जस की तस बनी हुई है।
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दूरस्थ फिटनेस सेंटर से आर्थिक बोझ
शासन के नए नियमों के अनुसार, अब वाहनों की फिटनेस केवल ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन (ATS) पर ही संभव है। आगर जिले में ऐसा कोई केंद्र न होने के कारण चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
| समस्या | प्रभाव |
|---|---|
| दूरी | 150 से 200 किलोमीटर दूर दूसरे जिलों में जाना |
| आर्थिक नुकसान | समय की बर्बादी और अतिरिक्त यात्रा खर्च |
| तकनीकी अड़चन | ATS सेंटरों पर सर्वर डाउन और तकनीकी खामियां |
बीमा और परमिट पर भी मंडराया संकट
चालकों ने अपनी पीड़ा साझा करते हुए बताया कि फिटनेस प्रमाण-पत्र के अभाव में उनके वाहनों के परमिट रिन्यू नहीं हो पा रहे हैं। सबसे बड़ी चिंता इस बात की है कि यदि कोई दुर्घटना होती है, तो फिटनेस न होने के कारण बीमा कंपनी क्लेम देने से साफ इनकार कर देगी। इस दोहरी मार के कारण कई वाहन चालक मजबूरी में बिना फिटनेस के ही वाहन चलाने को मजबूर हैं, जो सुरक्षा की दृष्टि से भी जोखिम भरा है।
आंदोलन की चेतावनी
ज्ञापन के माध्यम से चालकों ने प्रशासन से निम्नलिखित मांगें की हैं:
- आगर जिले में तत्काल प्रभाव से फिटनेस सेवा बहाल की जाए।
- जब तक फिटनेस की सुविधा शुरू नहीं होती, तब तक चालानी कार्रवाई पर पूरी तरह रोक लगाई जाए।
- यदि समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो चालक अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने को मजबूर होंगे।
चालकों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों को नजरअंदाज किया गया, तो वे अपने वाहन सड़क पर उतारना बंद कर देंगे, जिसका सीधा असर आम जनता की आवाजाही और स्थानीय परिवहन व्यवस्था पर पड़ेगा।









