गाजियाबाद में सीएम योगी का बड़ा तोहफा: 868 करोड़ की विकास परियोजनाओं का किया शिलान्यास
गाजियाबाद। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को गाजियाबाद के दौरे के दौरान क्षेत्र को बड़ी सौगात दी। उन्होंने 868 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली 90 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री का पूरा जोर कानून-व्यवस्था, सुशासन और प्रदेश के सर्वांगीण विकास पर रहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश में विकास की मजबूत इमारत कानून-व्यवस्था की नींव पर खड़ी है, जिसके चलते आज यूपी देशभर के निवेशकों की पहली पसंद बना हुआ है।
सुशासन और कानून का राज है विकास की कुंजी
संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि सुशासन तभी आता है जब राज्य में कानून का राज हो। उन्होंने अपराध और अपराधियों के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति को दोहराते हुए कहा, “जहां सुरक्षा का माहौल होगा, वहीं सुशासन आएगा। सुशासन से ही समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है और समृद्धि के साथ विकास की गति तेज होती है। जब सुरक्षा और सुशासन का मेल होता है, तब निवेश बढ़ता है, रोजगार के अवसर पैदा होते हैं और प्रदेश के युवाओं को काम मिलता है।”
गाजियाबाद: गुंडागर्दी से सुशासन के मॉडल तक का सफर
मुख्यमंत्री ने पुरानी यादों को ताजा करते हुए कहा कि एक दशक पहले गाजियाबाद की छवि गंदगी, गुंडागर्दी और गैंगवार के लिए जानी जाती थी। दिल्ली का प्रवेश द्वार होने के बावजूद लोग यहां आने से कतराते थे। लेकिन आज स्थिति बिल्कुल उलट है; गाजियाबाद अब सुशासन का एक बेहतरीन मॉडल बनकर उभरा है और एनसीआर के ‘ग्रोथ इंजन’ के रूप में अपनी भूमिका निभा रहा है।
मेरठ-दिल्ली रैपिड रेल: एक ऐतिहासिक उपलब्धि
मेरठ-दिल्ली रैपिड रेल परियोजना का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने पिछली सरकारों की कार्यशैली पर सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि यह परियोजना लंबे समय तक फाइलों में अटकी रही क्योंकि पिछली सरकार ने 32 हजार करोड़ के निवेश के डर से इसे मंजूरी नहीं दी थी। 2017 में भाजपा सरकार बनने के बाद इसे गति दी गई, जिसके परिणामस्वरूप अब मेरठ से दिल्ली की दूरी केवल 40 मिनट में सिमट गई है।
| विकास का आधार | प्रमुख बिंदु |
|---|---|
| कुल परियोजना लागत | 868 करोड़ रुपये |
| परियोजनाओं की संख्या | 90 |
| मुख्य उद्देश्य | सुरक्षा, सुशासन और रोजगार |
पूर्ववर्ती सरकारों पर जोरदार हमला
सीएम योगी ने 2017 से पहले के यूपी का जिक्र करते हुए कहा कि तब दंगे, कर्फ्यू और अपराध आम बात थे। व्यापारी और बेटियां असुरक्षित महसूस करती थीं, निवेश का अकाल था और सरकारी भर्तियों में भ्रष्टाचार का बोलबाला था। उन्होंने पूर्ववर्ती सरकारों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि उस समय न तो विकास की स्पष्ट नीति थी और न ही नीयत। साथ ही, उन्होंने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर धार्मिक आस्था के प्रति उपेक्षा का आरोप लगाते हुए कहा कि उनकी सरकार ने कांवड़ यात्रा और अन्य धार्मिक आयोजनों पर जो पाबंदियां लगाई थीं, उन्हें जनता कभी नहीं भूलेगी।
अंत में मुख्यमंत्री ने कहा कि यूपी का विकास मॉडल “सुरक्षा से सुशासन और सुशासन से समृद्धि” के सिद्धांत पर अडिग है। इसी नीति के कारण आज राज्य में आधारभूत ढांचे का तेजी से विस्तार हो रहा है और रोजगार के नए अवसर सृजित हो रहे हैं।
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