UP News: संसद सत्र से पहले मायावती का बड़ा ऐलान, इन मुद्दों पर सरकार को घेरा

लखनऊ। संसद के आगामी मानसून सत्र के आगाज से ठीक पहले बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों को एक अहम नसीहत दी है। उन्होंने राजनीतिक दलों से आह्वान किया है कि वे संसद में हंगामे की संस्कृति से ऊपर उठकर देश के…

मानसून सत्र से पहले मायावती की दो टूक: हंगामे की राजनीति छोड़ जनहित के मुद्दों पर हो चर्चा

लखनऊ। संसद के आगामी मानसून सत्र के आगाज से ठीक पहले बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों को एक अहम नसीहत दी है। उन्होंने राजनीतिक दलों से आह्वान किया है कि वे संसद में हंगामे की संस्कृति से ऊपर उठकर देश के ज्वलंत और गंभीर मुद्दों पर सार्थक चर्चा करें। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपनी बात रखते हुए मायावती ने सवाल किया कि क्या 20 जुलाई से शुरू होने वाला मानसून सत्र पिछली बार की तरह ही शोर-शराबे और स्थगन की भेंट चढ़ जाएगा, या फिर इस बार देश की आम जनता से जुड़े विषयों पर ठोस संवाद देखने को मिलेगा?

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जनता की समस्याओं पर केंद्रित हो संसद की कार्यवाही

मायावती ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में देश की जनता महंगाई, गरीबी, बढ़ती बेरोजगारी, महिलाओं की सुरक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं में हो रहे पेपर लीक जैसे गंभीर संकटों से जूझ रही है। इन समस्याओं को लेकर देश भर के नागरिकों में गहरा रोष और बेचैनी है। बसपा सुप्रीमो ने जोर देकर कहा कि संसद का प्राथमिक दायित्व जनता की इन चिंताओं को गंभीरता से सुनना और उनके समाधान के लिए ठोस पहल करना है। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि केवल एक-दूसरे पर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप लगाने से जनता की तकलीफें कम नहीं होंगी।

प्रमुख मुद्दे और अर्थव्यवस्था पर चिंता

संसद की कार्यवाही को लेकर बसपा प्रमुख ने कुछ प्रमुख विषयों को रेखांकित किया है, जिन पर सरकार और विपक्ष को अपना ध्यान केंद्रित करना चाहिए:

  • महंगाई और बेरोजगारी: आम आदमी की कमर तोड़ती महंगाई और युवाओं का भविष्य अंधकार में डालती बेरोजगारी।
  • महिला सुरक्षा: देश में महिलाओं के प्रति बढ़ते अपराधों पर सख्त कानून और चर्चा।
  • परीक्षाओं में गड़बड़ी: प्रतियोगी परीक्षाओं में बार-बार हो रहे पेपर लीक से छात्रों का भविष्य खतरे में।
  • आर्थिक स्थिति: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और भारतीय रुपये की गिरती कीमत का अर्थव्यवस्था पर बुरा असर।

संसदीय परंपराओं के पालन पर जोर

मायावती ने अपनी बात रखते हुए कहा कि संसद को लोकतांत्रिक मर्यादाओं और परंपराओं के अनुरूप चलाया जाना चाहिए, ताकि देश के सामने खड़े गंभीर सवालों पर सही निर्णय लिए जा सकें। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बदलती परिस्थितियों का सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था और आम आदमी के जीवन पर पड़ रहा है, इसलिए संसद में शांतिपूर्ण ढंग से इन मुद्दों पर मंथन करना अनिवार्य है।

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बता दें कि मायावती का यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश के राजनीतिक गलियारों में मानसून सत्र को लेकर सरगर्मियां तेज हैं। वे पहले भी कई मौकों पर संसद की बाधित कार्यवाही को लेकर अपनी नाराजगी जता चुकी हैं और सदन को जनहित के लिए इस्तेमाल करने की वकालत करती रही हैं।

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