UP News: पहली ही बाढ़ में बह गए 8.73 करोड़ के सुरक्षा इंतजाम

सतीश सिंह, लखनऊ। बलिया में घाघरा नदी का बढ़ता जलस्तर तबाही का पर्याय बन गया है। बांसडीह तहसील के महाराजपुर गांव में नदी के कटाव को रोकने के लिए 8 करोड़ 73 लाख रुपये की लागत से जो सुरक्षा दीवारें (ठोकरें) बनाई गई थीं, वे पहली ही चुनौती में ढह गई हैं। ग्रामीणों का आरोप…

बलिया में घाघरा का रौद्र रूप: 8.73 करोड़ के कटानरोधी कार्य बहे, ग्रामीणों में भारी आक्रोश

सतीश सिंह, लखनऊ। बलिया में घाघरा नदी का बढ़ता जलस्तर तबाही का पर्याय बन गया है। बांसडीह तहसील के महाराजपुर गांव में नदी के कटाव को रोकने के लिए 8 करोड़ 73 लाख रुपये की लागत से जो सुरक्षा दीवारें (ठोकरें) बनाई गई थीं, वे पहली ही चुनौती में ढह गई हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि कुल 17 ठोकरों में से 9 ठोकरें नदी के तेज बहाव में समा चुकी हैं, जिससे बाढ़ विभाग की कार्यप्रणाली और निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि प्रशासन ने कटाव से निपटने के लिए जो इंतजाम किए थे, वे पूरी तरह नाकाफी साबित हुए हैं। नौ ठोकरों के बह जाने के बाद विभाग अब बांस की कैरेट और झाड़-झंखाड़ डालकर खानापूर्ति करने में जुटा है, जिसे लेकर ग्रामीणों में गहरा असंतोष है। उनका मानना है कि यह केवल सरकारी धन की बर्बादी है, जिसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।

निर्माण में धांधली का आरोप

कटान पीड़ितों में शामिल वीरेंद्र यादव ने निर्माण कार्यों में भारी धांधली का आरोप लगाया है। उन्होंने बताया कि शुरुआत से ही ग्रामीणों ने निर्माण कार्य का विरोध किया था। जहां मानक के अनुसार बालू भरी बोरियां लगनी थीं, वहां मिट्टी का इस्तेमाल किया गया। बोल्डर लगाने के काम में भी भारी अनियमितताएं बरती गईं, जिसकी शिकायत अधिकारियों से की गई थी, लेकिन आज तक किसी भी जिम्मेदार अधिकारी के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।

ग्रामीणों का कहना है कि अभी बाढ़ की शुरुआत है और नदी का जलस्तर अभी और बढ़ना बाकी है। यदि स्थिति यही रही, तो शेष बची ठोकरें भी बह जाएंगी और गांव का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा। आरोप है कि विभाग नदी के किनारे से ही मिट्टी निकालकर बोरियों में भर रहा है, जिससे नदी के तट पर बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं और कटाव का खतरा और अधिक बढ़ गया है। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से भी गुहार लगाई थी, लेकिन निर्देशों का पालन नहीं हुआ।

गोपाल नगर टांडी में भी तबाही का मंजर

बैरिया तहसील के गोपाल नगर टांडी गांव का एक दिल दहला देने वाला वीडियो सामने आया है, जिसमें एक पूरा घर भरभराकर घाघरा नदी की लहरों में समा गया। इस घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल है। प्रशासन के दावों और हकीकत के बीच का अंतर अब साफ नजर आ रहा है।

विवरणजानकारी
कुल लागत8.73 करोड़ रुपये
कुल ठोकरें17
बह चुकी ठोकरें9

अब सवाल यह है कि करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद यह सुरक्षा दीवारें नदी की पहली मार भी क्यों नहीं झेल पाईं? क्या प्रशासन अब भी जागकर जियो-ट्यूब जैसी आधुनिक तकनीक का सहारा लेगा या फिर ग्रामीणों को उनके हाल पर छोड़ दिया जाएगा? इसका जवाब अब बाढ़ विभाग और जिला प्रशासन को देना ही होगा।

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