Airfare: हवाई किराये पर लगाम लगाने के लिए सरकार बनाएगी नए नियम

देश में त्योहारों और पीक सीजन के दौरान एयरलाइंस कंपनियों द्वारा मनमाने तरीके से वसूले जा रहे हवाई किराए पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि वे हवाई किराए को नियंत्रित करने वाले नियमों का मसौदा दो सप्ताह के…

हवाई किराए पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: केंद्र सरकार को 2 हफ्ते में नियम पेश करने का आदेश

देश में त्योहारों और पीक सीजन के दौरान एयरलाइंस कंपनियों द्वारा मनमाने तरीके से वसूले जा रहे हवाई किराए पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि वे हवाई किराए को नियंत्रित करने वाले नियमों का मसौदा दो सप्ताह के भीतर ‘सीलबंद लिफाफे’ में अदालत में जमा करें।

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने स्पष्ट किया कि संसद में नियम पेश होने की प्रक्रिया अपनी जगह है, लेकिन अदालत को इसकी जानकारी तय समय सीमा के भीतर मिलनी चाहिए। इस मामले में अगली सुनवाई अब 3 अगस्त को निर्धारित की गई है।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला एक जनहित याचिका (PIL) से जुड़ा है, जिसे सामाजिक कार्यकर्ता एस. लक्ष्मीनारायणन ने दायर किया था। याचिका में मांग की गई है कि एयरलाइंस के किराए और अतिरिक्त शुल्क पर निगरानी रखने के लिए एक स्वतंत्र और मजबूत रेगुलेटर का गठन किया जाना चाहिए। याचिकाकर्ता का आरोप है कि एयरलाइंस कंपनियां मनमाने ढंग से किराए में 300% तक की बढ़ोतरी कर देती हैं, जिससे आम यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

सुनवाई के दौरान जब केंद्र सरकार ने कहा कि किराए को नियंत्रित करने के लिए नियम तैयार हैं और इन्हें 30 दिनों के भीतर संसद में पेश किया जाएगा, तो कोर्ट ने इस पर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए दो हफ्ते का अल्टीमेटम दे दिया।

सुप्रीम कोर्ट की पिछली टिप्पणियां

सुप्रीम कोर्ट इस मुद्दे को लेकर पिछले काफी समय से सरकार को फटकार लगाता रहा है। इससे पहले 30 अप्रैल को भी कोर्ट ने एफिडेविट फाइल न करने पर केंद्र सरकार की खिंचाई की थी। कोर्ट की नाराजगी के प्रमुख बिंदु निम्नलिखित रहे हैं:

  • 23 फरवरी 2026: त्योहारों और आपातकालीन स्थितियों में किराए में अचानक बढ़ोतरी को ‘गंभीर चिंता का विषय’ बताया था।
  • 17 नवंबर 2025: कोर्ट ने केंद्र, DGCA और एयरपोर्ट इकोनॉमिक रेगुलेटरी अथॉरिटी (AERA) को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था।

एयरलाइंस का पक्ष और परिचालन खर्च

एयरलाइंस कंपनियों का तर्क है कि उनके कुल परिचालन खर्च में 30% से 40% हिस्सेदारी केवल जेट फ्यूल (ATF) की होती है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन की कीमतों में उछाल आने के कारण टिकटों के दाम प्रभावित होते हैं। हालांकि, कोर्ट का मानना है कि इस आधार पर यात्रियों का शोषण नहीं किया जा सकता।

यात्रियों के लिए अन्य महत्वपूर्ण अपडेट

हवाई यात्रियों की सुविधा के लिए हाल ही में DGCA ने भी कुछ बड़े बदलाव किए हैं। अब यात्रियों को टिकट बुकिंग से संबंधित नियमों में राहत मिली है:

नियमविवरण
टिकट रिफंड48 घंटे के भीतर टिकट कैंसिल करने पर फुल रिफंड मिलेगा।
शर्तयह सुविधा फ्लाइट उड़ने से कम से कम 7 दिन पहले बुकिंग कराने पर लागू होगी।

सरकार और एयरलाइंस के बीच चल रही इस कानूनी खींचतान पर अब सभी की निगाहें 3 अगस्त को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जिससे यह साफ हो पाएगा कि क्या आम जनता को हवाई किराए में राहत मिल पाएगी या नहीं।