शेयर बाजार अपडेट: सेंसेक्स-निफ्टी में भारी गिरावट, क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल
भारतीय शेयर बाजार में आज 23 जुलाई 2026 को लगातार दबाव देखने को मिला। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 364 अंक गिरकर 76,391 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 127 अंक की गिरावट के साथ 23,870 पर सिमट गया। बाजार में आज मुख्य रूप से रियल्टी, एनर्जी और बैंकिंग सेक्टर के शेयरों में बिकवाली का माहौल रहा, जिससे निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई।
कच्चे तेल में आग: 98 डॉलर के पार पहुंची कीमतें
वैश्विक बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतों में आज करीब 4% की भारी तेजी दर्ज की गई, जिसके बाद यह 98 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया है। भू-राजनीतिक तनाव, विशेष रूप से अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष के कारण बाजार में चिंताएं बढ़ गई हैं। विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि तनाव और गहराता है, तो कच्चे तेल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकती हैं, जिसका सीधा असर भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर पड़ना तय है।
एशियाई बाजारों में मजबूती और अमेरिकी बाजारों की स्थिति
भारतीय बाजारों की विपरीत स्थिति के बीच आज एशियाई बाजारों में सकारात्मक रुख रहा। जहाँ घरेलू बाजार गिरावट से जूझते रहे, वहीं पड़ोसी देशों के सूचकांकों में तेजी देखी गई:
- कोस्पी (दक्षिण कोरिया): 7097 अंक (+4.40%)
- निक्केई (जापान): 66423 अंक (+0.46%)
- हैंगसेंग (हॉन्गकॉन्ग): 25211 अंक (+1.28%)
बीते दिन 22 जुलाई को अमेरिकी बाजारों में भी सुस्ती देखी गई थी, जहाँ डाउ जोन्स और नैस्डैक जैसे प्रमुख सूचकांक हल्की गिरावट के साथ बंद हुए थे।
संस्थागत निवेशकों का हाल (FII और DII डेटा)
शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों (FII) और घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) की गतिविधि पर नजर डालें तो पिछले 7 दिनों में विदेशी निवेशकों ने शुद्ध रूप से ₹4,660 करोड़ के शेयरों की खरीदारी की है। हालांकि, आज के सत्र में FII और DII दोनों ही बिकवाली के दबाव में दिखे।
| कैटेगरी | लेटेस्ट (करोड़ में) | बीते 7 दिन | बीते 30 दिन |
|---|---|---|---|
| DII | -418 | +1,255 | +40,340 |
| FII/FPI | -819 | -667 | -10,204 |
बाजार का पिछला प्रदर्शन
बता दें कि कल यानी 22 जुलाई को भी बाजार में बिकवाली का जोर था। उस दिन सेंसेक्स 715 अंक फिसलकर 76,755 पर और निफ्टी 191 अंक टूटकर 23,996 पर बंद हुआ था। लगातार दो दिनों की गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। बाजार के जानकारों का मानना है कि वैश्विक संकेतों और कच्चे तेल की कीमतों पर निवेशकों को पैनी नजर रखने की आवश्यकता है।









