आईटीआर फाइलिंग की डेडलाइन नजदीक: टैक्स रिटर्न भरते समय इन 10 बातों का रखें खास ख्याल
वित्त वर्ष 2025-26 के लिए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करने की अंतिम तिथि नजदीक आ गई है। आम करदाताओं के लिए रिटर्न फाइल करने की आखिरी तारीख 31 जुलाई 2026 है, जबकि बिजनेस क्लास (ITR-3 और 4) के लिए यह डेडलाइन 31 अगस्त तय की गई है। समय सीमा चूकने पर करदाताओं को ‘बिलेटेड रिटर्न’ दाखिल करना होगा, जिसके लिए जुर्माना भी देना पड़ सकता है। इनकम टैक्स विभाग अब एआई (AI) और डेटा एनालिटिक्स के जरिए आपके सभी वित्तीय लेन-देन पर कड़ी नजर रख रहा है, इसलिए रिटर्न में किसी भी तरह की छोटी चूक भारी टैक्स डिमांड या पेनाल्टी का कारण बन सकती है।
इनकम टैक्स रिटर्न भरते समय रखें ये 10 सावधानियां
टैक्स एक्सपर्ट और सीए आनंद जैन के अनुसार, रिटर्न फाइल करते समय निम्नलिखित बिंदुओं का ध्यान रखना अनिवार्य है:
- फॉर्म 16 पर ही निर्भर न रहें: फॉर्म 16 केवल सैलरी और कटे हुए टीडीएस की जानकारी देता है। एफडी, आरडी, डिविडेंड, रेंट, फ्रीलांसिंग आय और शेयर-म्यूचुअल फंड से हुए लाभ को भी रिटर्न में जरूर शामिल करें।
- सही ITR फॉर्म का चुनाव: गलत फॉर्म चुनने पर आपका रिटर्न ‘डिफेक्टिव’ माना जा सकता है। अपनी आय के स्रोत (सैलरी, बिजनेस, कैपिटल गेन) के आधार पर ही ITR-1 से ITR-4 तक सही फॉर्म चुनें।
- AIS और 26AS का मिलान: रिटर्न भरने से पहले फॉर्म 26AS, एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) और टैक्सपेयर इंफॉर्मेशन समरी (TIS) को जरूर जांचें। विभाग के डेटा से जानकारी मेल न खाने पर नोटिस मिल सकता है।
- नौकरी बदलने पर कुल आय जोड़ें: यदि आपने वित्त वर्ष के दौरान नौकरी बदली है, तो पुराने और नए दोनों एम्प्लॉयर से मिली सैलरी को जोड़कर ही रिटर्न भरें।
- बैंक खातों की सटीक जानकारी: सभी बैंक खातों का विवरण दें। रिफंड पाने के लिए अकाउंट नंबर और आईएफएससी (IFSC) कोड की सही जानकारी देना बेहद जरूरी है।
- ब्याज आय का खुलासा: सेविंग अकाउंट, एफडी और बॉन्ड से मिलने वाले ब्याज को न छिपाएं। विभाग के पास इसकी पूरी जानकारी होती है।
- निवेश का पूरा ब्योरा: शेयर, म्यूचुअल फंड या प्रॉपर्टी की बिक्री से हुए लाभ या नुकसान की घोषणा जरूर करें। नुकसान दिखाने से भविष्य में टैक्स बचत में मदद मिल सकती है।
- कटौतियों (Deductions) का सही दावा: धारा 80C, 80D और होम लोन जैसे निवेशों पर टैक्स छूट का दावा केवल दस्तावेजों के आधार पर ही करें।
- विदेशी संपत्ति का विवरण: विदेशी शेयर, बैंक खाते या अन्य निवेशों का खुलासा करना अनिवार्य है, विशेष रूप से रेजिडेंट टैक्सपेयर्स के लिए।
- ई-वेरिफिकेशन है अनिवार्य: रिटर्न सबमिट करना ही पर्याप्त नहीं है। आधार ओटीपी, नेट बैंकिंग या अन्य माध्यमों से 120 दिनों के भीतर ई-वेरिफिकेशन जरूर करें, अन्यथा रिटर्न अमान्य हो जाएगा।
देरी करने पर कितना लगेगा जुर्माना?
यदि आप 31 जुलाई की समय सीमा के भीतर रिटर्न दाखिल नहीं कर पाते हैं, तो आपको 31 दिसंबर तक ‘बिलेटेड रिटर्न’ भरने का मौका मिलेगा, लेकिन इसके लिए आपको लेट फीस चुकानी होगी:
- 5 लाख रुपये से अधिक की वार्षिक आय: 5,000 रुपये का जुर्माना।
- 5 लाख रुपये से कम की वार्षिक आय: 1,000 रुपये का जुर्माना।
विशेषज्ञों की सलाह है कि अंतिम समय की तकनीकी खामियों से बचने के लिए जल्द से जल्द अपना आईटीआर फाइल करें और विभाग द्वारा मुहैया कराए गए डेटा के साथ अपनी जानकारी का मिलान जरूर करें।










