पाकिस्तान में ईंधन कीमतों में बड़ा बदलाव: पेट्रोल सस्ता, डीजल हुआ महंगा
पाकिस्तान की सरकार ने देश में ईंधन की कीमतों में बड़ा फेरबदल किया है। ताजा आदेश के अनुसार, पेट्रोल के दाम में 35 पैसे प्रति लीटर की मामूली कटौती की गई है, जबकि दूसरी ओर हाई-स्पीड डीजल (HSD) की कीमतों में 5.71 रुपये प्रति लीटर की भारी बढ़ोतरी की गई है। नई दरें 21 जुलाई से पूरे देश में प्रभावी हो चुकी हैं। इस बदलाव के बाद, अब पाकिस्तानी बाजार में पेट्रोल 315.80 रुपये प्रति लीटर और डीजल 360.06 रुपये प्रति लीटर की दर से बिक रहा है। गौरतलब है कि पाकिस्तान में भारतीय रुपये की वैल्यू लगभग 2.89 पाकिस्तानी रुपये के बराबर है।
ईंधन दरों में बदलाव की नई नीति: अब रोजाना तय होंगे दाम
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतों में हो रहे निरंतर उतार-चढ़ाव को देखते हुए पाकिस्तानी सरकार ने एक बड़ा नीतिगत निर्णय लिया है। पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज मलिक ने आधिकारिक घोषणा करते हुए बताया कि अब पाकिस्तान में फ्यूल रेट्स साप्ताहिक आधार के बजाय रोजाना तय किए जाएंगे। सरकार का मानना है कि इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार के रुझानों को तुरंत ग्राहकों तक पहुंचाया जा सकेगा।
डीलर एसोसिएशन का विरोध और जनता पर महंगाई की मार
सरकार के इस रोजाना रेट तय करने के फैसले पर बवाल मच गया है। ऑल पाकिस्तान डीलर्स एसोसिएशन ने इस नई व्यवस्था को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि वे इस फैसले के खिलाफ जल्द ही सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करेंगे। इस बदलाव के प्रभाव को लेकर विशेषज्ञों का मानना है:
- मध्यम वर्ग पर असर: पेट्रोल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा बोझ आम जनता, छोटी कार मालिकों और टू-व्हीलर सवारों पर पड़ता है।
- महंगाई का खतरा: डीजल के दाम बढ़ने से परिवहन लागत में वृद्धि होगी, जिससे आवश्यक वस्तुओं के महंगे होने और देश में महंगाई बढ़ने का गंभीर खतरा पैदा हो गया है।
- आर्थिक आधार: पाकिस्तान में डीजल का उपयोग ट्रकों, बसों, पावर प्लांट्स और भारी जनरेटरों में होता है, जो अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं।
आंकड़ों के मुताबिक, पाकिस्तान में हर महीने करीब 7 से 8 लाख टन पेट्रोल और डीजल की खपत होती है, जबकि केरोसिन की मांग मात्र 10 हजार टन है। यही कारण है कि पेट्रोल और डीजल सरकार के लिए राजस्व जुटाने का सबसे प्रमुख और महत्वपूर्ण जरिया बने हुए हैं। फिलहाल, ईंधन की ये नई दरें अप्रैल में दर्ज किए गए रिकॉर्ड स्तर से काफी कम हैं, लेकिन डीजल की कीमतों में हुई हालिया बढ़ोतरी ने आम आदमी की चिंताएं बढ़ा दी हैं।









