Tapti Jayanti 2026: आज है ताप्ती जयंती, जानें पूजा विधि और शुभ मुहूर्त

ताप्ती जयंती 2026: मध्य प्रदेश की सतपुड़ा पर्वतमाला से उद्गमित होने वाली ताप्ती नदी भारत की प्रमुख और पवित्र नदियों में से एक है। लगभग साढ़े सात सौ किलोमीटर की यात्रा तय करने के बाद यह नदी गुजरात के खंभात की खाड़ी में विलीन हो जाती है। पौराणिक ग्रंथों के अनुसार, मां ताप्ती को सूर्य…

ताप्ती जयंती 2026: सूर्य पुत्री मां ताप्ती के जन्मोत्सव का महत्व और पूजा विधि

ताप्ती जयंती 2026: मध्य प्रदेश की सतपुड़ा पर्वतमाला से उद्गमित होने वाली ताप्ती नदी भारत की प्रमुख और पवित्र नदियों में से एक है। लगभग साढ़े सात सौ किलोमीटर की यात्रा तय करने के बाद यह नदी गुजरात के खंभात की खाड़ी में विलीन हो जाती है। पौराणिक ग्रंथों के अनुसार, मां ताप्ती को सूर्य देव की पुत्री और शनि देव की बहन माना गया है। प्रतिवर्ष आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को ताप्ती जयंती के रूप में श्रद्धापूर्वक मनाया जाता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस विशेष दिवस पर ताप्ती नदी में स्नान और माता की विधि-विधान से पूजा करने से शनि देव के प्रकोप जैसे साढ़ेसाती, ढैय्या और महादशा के कष्टों से मुक्ति मिलती है। साथ ही, कुंडली में मौजूद सूर्य संबंधित दोषों का भी निवारण होता है।

ताप्ती जयंती 2026 पूजा का शुभ मुहूर्त

ताप्ती जयंती के पावन अवसर पर पूजा-अर्चना के लिए सूर्योदय से लेकर दोपहर तक का समय अत्यंत शुभ माना गया है। दान-पुण्य और अनुष्ठान के लिए अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:19 बजे से शुरू होकर 01:11 बजे तक रहेगा। चूंकि इस वर्ष यह जयंती सोमवार को पड़ रही है, अतः इस दिन भगवान शिव की आराधना करना भी विशेष फलदायी होगा।

ताप्ती जयंती पर पूजा की शास्त्रीय विधि

  • सर्वप्रथम ताप्ती नदी में स्नान करें। यदि यह संभव न हो, तो घर पर ही जल में थोड़ा गंगाजल मिलाकर स्नान करें।
  • मां ताप्ती का स्मरण करते हुए सूर्य देव को अर्घ्य दें।
  • माता की प्रतिमा या चित्र को हल्दी, कुमकुम, अक्षत, पीले फूल और कपूर अर्पित कर पूजा करें।
  • माता को भोग के रूप में मौसमी फल और हलवा अर्पित करें तथा उन्हें चुनरी चढ़ाएं।
  • पूजा के दौरान ताप्ती माता की जन्म कथा का पाठ अवश्य करें।
  • आरती के साथ पूजा संपन्न करें। इस दिन दीपदान का विशेष महत्व है, अतः नदी के तट पर या घर के मुख्य द्वार और तुलसी के पास दीपक जलाएं।

मां ताप्ती के जन्म की पौराणिक कथा

स्कंद पुराण में वर्णित कथा के अनुसार, सूर्य देव का प्रचंड ताप पृथ्वी और स्वर्ग लोक के लिए असहनीय हो गया था। स्वयं सूर्य देव भी अपने तीव्र ताप को नियंत्रित करने में असमर्थ थे। तब उन्होंने अपने शरीर से उत्पन्न उस तीव्र ताप को एक जलधारा के रूप में पृथ्वी पर प्रवाहित किया, ताकि उनका ताप शांत हो सके। सूर्य के इसी ‘ताप’ से माता ताप्ती का प्राकट्य हुआ, जिसके कारण उनका नाम तापी पड़ा।

नदी का नामउद्गम स्थलमहत्व
ताप्तीसतपुड़ा पर्वत (म.प्र.)पाप नाशिनी एवं कल्याणकारी

शास्त्रों में कहा गया है कि गंगा में स्नान, नर्मदा के दर्शन और ताप्ती नदी का स्मरण मात्र करने से व्यक्ति के जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट हो जाते हैं।

अस्वीकरण: इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य सूचनाओं पर आधारित है। इसकी पुष्टि हमारा संस्थान नहीं करता है।