कानपुर के खेरेपति मंदिर में नाग पंचमी पर अद्भुत श्रृंगार: जीवित सांपों से सजते हैं भगवान विष्णु
हिंदू पंचांग के अनुसार, नाग पंचमी का पावन पर्व इस वर्ष 17 अगस्त को पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। हालांकि देशभर में नाग देवता की पूजा की परंपरा है, लेकिन उत्तर प्रदेश के कानपुर स्थित प्रसिद्ध खेरेपति मंदिर में इस दिन का नजारा अत्यंत दुर्लभ और विस्मयकारी होता है। इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि नाग पंचमी के अवसर पर भगवान श्री हरि विष्णु की प्रतिमा का श्रृंगार जीवित नाग-नागिन के जोड़ों से किया जाता है, जिसे देखने के लिए दूर-दराज से श्रद्धालु उमड़ पड़ते हैं।
माल रोड स्थित मंदिर में जुटती है भक्तों की भारी भीड़
कानपुर के व्यस्ततम इलाके माल रोड पर स्थित यह मंदिर अपनी अनूठी परंपराओं के लिए विख्यात है। सावन के पूरे महीने यहां भक्तों का तांता लगा रहता है, लेकिन नाग पंचमी के दिन मंदिर का वातावरण पूरी तरह बदल जाता है। मंदिर प्रशासन द्वारा एक विशेष शीशे का कक्ष तैयार किया जाता है, जिसमें भगवान विष्णु की प्रतिमा के साथ जीवित सांपों को छोड़ा जाता है। जब सांप भगवान की प्रतिमा से लिपटते हैं, तो वह दृश्य साक्षात शेषनाग के दर्शन जैसा प्रतीत होता है, जो भक्तों की आस्था को और अधिक सुदृढ़ कर देता है।
200 साल पुराना इतिहास और शेषनाग से जुड़ी कथा
खेरेपति मंदिर के प्रति लोगों की गहरी आस्था के पीछे करीब 200 साल पुराना इतिहास और एक चमत्कारी कथा जुड़ी है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार:
- मंदिर की स्थापना एक स्वप्न के आधार पर की गई थी, जिसमें एक स्थानीय सेठ की माता को शेषनाग ने दर्शन देकर यहां मंदिर बनवाने का निर्देश दिया था।
- निर्माण कार्य के दौरान जब खुदाई की गई, तो वहां एक प्राचीन कुआं मिला, जिसमें बड़ी संख्या में सांप मौजूद थे।
- इस घटना के बाद से ही जनमानस में यह विश्वास स्थापित हो गया कि इस स्थान पर साक्षात शेषनाग का वास है।
सांपों की प्रदर्शनी और मेले का आकर्षण
नाग पंचमी के अवसर पर आयोजित होने वाले भव्य मेले में न केवल स्थानीय लोग बल्कि अन्य राज्यों से भी श्रद्धालु पहुंचते हैं। मंदिर प्रांगण में विभिन्न प्रजातियों के सांपों की प्रदर्शनी लगाई जाती है, जिसमें इच्छाधारी नाग-नागिन के जोड़ों का उल्लेख भी किया जाता है। यह धार्मिक आयोजन न केवल सांपों के प्रति भय को दूर करता है, बल्कि पर्यावरण और जीव संरक्षण के प्रति जागरूकता का भी संदेश देता है। मंदिर प्रबंधन सुरक्षा के पुख्ता इंतजामों के बीच इस अनुष्ठान को संपन्न कराता है, जिससे श्रद्धालु बिना किसी डर के भगवान विष्णु और नाग देवता का आशीर्वाद प्राप्त कर सकें।
डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और लोक परंपराओं पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल सामान्य जानकारी प्रदान करना है।










