पुरी जगन्नाथ रथयात्रा: इस्कॉन और मंदिर प्रशासन के बीच बढ़ा विवाद
भगवान जगन्नाथ की विश्वविख्यात रथयात्रा को लेकर पुरी स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (SJTA) और अंतरराष्ट्रीय कृष्णभावनामृत संघ (इस्कॉन) के बीच तनातनी फिर से तेज हो गई है। विवाद का मुख्य कारण इस्कॉन द्वारा निर्धारित तिथियों के अलावा अन्य दिनों में रथयात्रा का आयोजन करना है। पुरी मंदिर की उच्च स्तरीय समिति ने इस्कॉन के उन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है, जिनमें कहा गया था कि रथयात्रा किसी भी दिन निकाली जा सकती है। मंदिर प्रशासन ने इसे करोड़ों भक्तों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ और उन्हें गुमराह करने वाला कदम बताया है।
वर्ष 2026 में भगवान जगन्नाथ की मुख्य रथयात्रा 16 जुलाई (गुरुवार) को शुरू होगी और इसका समापन 24 जुलाई 2026 को होगा।
विवाद की जड़ और मंदिर प्रशासन का रुख
पुरी मंदिर प्रशासन का स्पष्ट कहना है कि इस्कॉन द्वारा हाल ही में जारी की गई विज्ञप्ति में किए गए दावे पूरी तरह निराधार हैं। प्रशासन के अनुसार, सनातन धर्म और शास्त्रों में रथयात्रा के लिए केवल आषाढ़ शुक्ल द्वितीया की तिथि ही मान्य है। किसी भी अन्य दिन रथयात्रा निकालना परंपराओं का उल्लंघन है और इससे वैश्विक स्तर पर भक्तों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा होती है।
प्रमुख तिथियों का विवरण
| विवरण | तिथि |
|---|---|
| रथयात्रा का आरंभ | 16 जुलाई 2026 |
| रथयात्रा का समापन | 24 जुलाई 2026 |
क्या है इस्कॉन का पक्ष?
जब इस संवेदनशील मुद्दे पर इस्कॉन के राष्ट्रीय प्रवक्ता और कंट्री डायरेक्टर ऑफ कम्युनिकेशंस, युधिष्ठिर गोविंदा दास से संपर्क किया गया, तो उन्होंने कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि अभी तक उन्होंने मंदिर प्रशासन का औपचारिक बयान नहीं देखा है, इसलिए इस पर कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी।
पूर्व में भी हो चुकी है बैठक
यह विवाद नया नहीं है। इससे पहले 20 मार्च 2025 को भुवनेश्वर में श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन और इस्कॉन के प्रतिनिधियों के बीच एक उच्च स्तरीय बैठक हुई थी। उस दौरान इस्कॉन ने विदेश में साल भर अलग-अलग तारीखों पर रथयात्रा निकालने के पक्ष में अपने तर्क दिए थे, लेकिन पुरी के धर्माचार्यों ने शास्त्रों और पुराणों का हवाला देते हुए उन तर्कों को पूरी तरह से खारिज कर दिया था।
रथयात्रा की तिथि क्यों है इतनी महत्वपूर्ण?
- धार्मिक परंपरा: रथयात्रा केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि सदियों पुरानी सनातन परंपरा है।
- पंचांग की भूमिका: हिंदू पंचांग के अनुसार आषाढ़ शुक्ल द्वितीया का दिन ही भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के भ्रमण के लिए निर्धारित है।
- आस्था का प्रतीक: इस तिथि में बदलाव को धार्मिक मान्यताओं के विपरीत माना जाता है, इसीलिए मंदिर प्रशासन इसे लेकर बेहद सख्त रुख अपनाए हुए है।
