पुष्कर पशु मेले का नया स्वरूप: पहली बार होगी रोमांचक एंड्योरेंस राइडिंग
राजस्थान का विश्व प्रसिद्ध पुष्कर पशु मेला इस बार एक नई और रोमांचक पहचान के साथ सजने जा रहा है। मेले के इतिहास में पहली बार अरावली की सुंदर तलहटी में एंड्योरेंस राइडिंग का आयोजन किया जाएगा। यह लंबी दूरी की घुड़सवारी प्रतियोगिता न केवल पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र होगी, बल्कि घोड़ों की सहनशक्ति और राइडर के कौशल की कड़ी परीक्षा भी साबित होगी।
पशुपालन विभाग के एडिशनल डायरेक्टर डॉ. नवीन परिहार ने बताया कि इस प्रतियोगिता में घोड़े और घुड़सवार को कुल 60 किलोमीटर की दूरी तय करनी होगी। सुरक्षा और स्वास्थ्य मानकों को ध्यान में रखते हुए इस पूरे सफर को 20-20 किलोमीटर के तीन लूप में बांटा गया है।
- स्वास्थ्य परीक्षण: हर 20 किलोमीटर के पड़ाव पर घोड़ों की हार्ट बीट, डिहाइड्रेशन और फिटनेस की गहन जांच की जाएगी।
- सख्त नियम: यदि कोई घोड़ा मेडिकल जांच में अनफिट पाया जाता है, तो उसे तुरंत प्रतियोगिता से बाहर कर दिया जाएगा।
- ट्रैक का चयन: प्रतियोगिता मोतीसर रोड स्थित पुराने हेलीपैड से शुरू होकर अरावली की तलहटी से होते हुए पिचोलिया की गोचर भूमि तक जाएगी।
महिला किसान वर्ष और विशेष आकर्षण
संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा वर्ष 2026 को ‘महिला किसान वर्ष’ घोषित किया गया है। इसी थीम को समर्पित करते हुए इस बार पुष्कर मेले में महिला किसानों का विशेष सम्मान किया जाएगा। मेले के समापन समारोह में महिला किसानों द्वारा बैलगाड़ी परेड का आयोजन किया जाएगा, जो नारी शक्ति को प्रोत्साहित करने का एक अनूठा प्रयास होगा।
| आकर्षण का नाम | विशेषता |
|---|---|
| रेवाल चाल | मारवाड़ी घोड़ों की विशेष चाल और उनकी सहनशीलता की 1 किलोमीटर की परीक्षा। |
| ट्रिक राइडिंग | घुड़सवारों द्वारा साहसी करतब और घोड़ों द्वारा दिखाए जाने वाले विभिन्न कौशल। |
पशुधन को बढ़ावा देने की अनूठी पहल
डॉ. परिहार ने जानकारी दी कि इस बार मेले में गाय और भैंसों की भागीदारी बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसके लिए राजस्थान के विभिन्न जिलों के साथ-साथ पड़ोसी राज्यों के पशुपालकों से भी संपर्क किया जा रहा है ताकि वे अपने सर्वश्रेष्ठ पशुओं के साथ मेले में शिरकत करें।
पुष्कर मेले की परंपरा रही है कि यहाँ हर साल हजारों ऊंट, घोड़े और अन्य पशुओं की खरीद-फरोख्त होती है, जिसमें करोड़ों रुपये का कारोबार होता है। मेले के दौरान आयोजित होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों में राजस्थानी लोक कलाकारों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर के कलाकार अपनी प्रस्तुति देते हैं। देशी-विदेशी पर्यटकों के लिए ऊंट दौड़, ऊंट नृत्य और सर्वश्रेष्ठ नस्ल प्रदर्शन जैसी प्रतियोगिताएं हमेशा की तरह मेले की रौनक बनी रहेंगी।
