जोधपुर उम्मेद अस्पताल में बड़ा चिकित्सा घोटाला: प्रसूता को चढ़ाया गलत खून, जांच रिपोर्ट में लापरवाही उजागर
जोधपुर के उम्मेद अस्पताल में 24 वर्षीय प्रसूता धापू भील को गलत ब्लड ग्रुप का खून चढ़ाने के गंभीर मामले में जांच कमेटी ने अपनी प्राथमिक रिपोर्ट मेडिकल कॉलेज प्रिंसिपल को सौंप दी है। रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से माना गया है कि अस्पताल प्रशासन की ओर से बिना किसी क्रॉस-चेक के मरीज को गलत खून चढ़ाया गया, जिससे उसकी जान जोखिम में पड़ गई।
हालांकि, 24 घंटे के भीतर सौंपी गई इस रिपोर्ट को मेडिकल कॉलेज प्रिंसिपल डॉ. बीएस जोधा ने अधूरा करार दिया है। उनका कहना है कि रिपोर्ट में उन जिम्मेदार कर्मियों के नाम स्पष्ट नहीं हैं, जिनकी लापरवाही से यह घटना घटी। डॉ. जोधा ने कमेटी से तत्काल प्रभाव से दोषियों की पहचान कर विस्तृत नाम मांगे हैं। उन्होंने साफ किया कि इस मामले में रेजिडेंट डॉक्टर, लैब टेक्नीशियन और नर्सिंग स्टाफ की भूमिका संदिग्ध है और इन सभी को जल्द ही नोटिस जारी किए जाएंगे।
घटना का विवरण: कब और कैसे हुई गफलत
- 11 जुलाई: धापू भील की बावड़ी अस्पताल में सामान्य डिलीवरी हुई। खून की कमी के चलते उसे उम्मेद अस्पताल रेफर किया गया।
- 12 जुलाई: अस्पताल में गलत ब्लड चढ़ाए जाने के बाद प्रसूता को कंपकपी हुई और पेशाब की थैली में खून आने लगा।
- 13 जुलाई: गंभीर हालत को देखते हुए मरीज को महात्मा गांधी अस्पताल (MGH) रेफर किया गया।
वर्तमान में धापू भील का इलाज महात्मा गांधी अस्पताल के आईसीयू में चल रहा है, जहां उसे लगातार डायलिसिस पर रखा गया है।
जांच में क्या आया सामने?
उम्मेद अस्पताल अधीक्षक डॉ. मोहन मकवाना द्वारा गठित पांच सदस्यीय जांच टीम ने पाया कि नाम में समानता होने के कारण यह गफलत हुई। दो मरीजों के नाम और उनके पतियों के नाम एक जैसे होने की वजह से लैब और नर्सिंग स्टाफ ने बिना क्रॉस-चेक किए बी-पॉजिटिव ब्लड, जो किसी अन्य मरीज के लिए था, धापू भील को चढ़ा दिया।
| जिम्मेदार विभाग | लापरवाही का कारण |
|---|---|
| पैथोलॉजी/लैब | बिना क्रॉस-चेक के ब्लड रिलीज करना |
| नर्सिंग स्टाफ | मरीज की पहचान सुनिश्चित न करना |
| रेजिडेंट डॉक्टर्स | निगरानी और प्रोटोकॉल का पालन न करना |
किडनी पर असर और मौजूदा स्थिति
महात्मा गांधी अस्पताल के अधीक्षक डॉ. फतेह सिंह ने बताया कि गलत खून चढ़ने के कारण प्रसूता की किडनी गंभीर रूप से प्रभावित हुई थी, जिसके चलते उसका यूरिन बनना बंद हो गया था। फिलहाल, डायलिसिस के जरिए उनकी स्थिति में मामूली सुधार दर्ज किया जा रहा है।
प्रसूता के पति किशनाराम ने दुख जताते हुए कहा कि उन्हें अंधेरे में रखा गया और जब वे एमजीएच पहुंचे तब उन्हें सच्चाई का पता चला। अब पूरे मामले में सख्त विभागीय कार्रवाई की तैयारी की जा रही है ताकि भविष्य में ऐसी जानलेवा लापरवाही न दोहराई जाए।










