Road Accident: हरिद्वार से लौट रहे 3 कांवड़ियों की दर्दनाक मौत, 14 घायल


गाजियाबाद में बुधवार देर रात एक भीषण सड़क हादसे में खैरथल-तिजारा के शाहबाद गांव के तीन कांवड़ियों की दर्दनाक मौत हो गई। हरिद्वार से गंगा जल लेकर लौट रही एक पिकअप गाड़ी को तेज रफ्तार स्क्रैप लदे ट्रक ने जोरदार टक्कर मार दी। इस हादसे में 14 अन्य श्रद्धालु गंभीर रूप से घायल हुए हैं,…

गाजियाबाद सड़क हादसा: हरिद्वार से लौट रहे कांवड़ियों की पिकअप को ट्रक ने मारी टक्कर, 3 की मौत और 14 घायल

गाजियाबाद में बुधवार देर रात एक भीषण सड़क हादसे में खैरथल-तिजारा के शाहबाद गांव के तीन कांवड़ियों की दर्दनाक मौत हो गई। हरिद्वार से गंगा जल लेकर लौट रही एक पिकअप गाड़ी को तेज रफ्तार स्क्रैप लदे ट्रक ने जोरदार टक्कर मार दी। इस हादसे में 14 अन्य श्रद्धालु गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिन्हें नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। घटना की खबर मिलते ही शाहबाद गांव में मातम पसर गया और शोक स्वरूप ग्रामीणों ने अपनी दुकानें बंद रखीं।

हादसे का विवरण और मृतक

पुलिस और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हादसा बुधवार रात करीब 11:30 से 12 बजे के बीच हुआ। कांवड़ियों ने माजरी गुर्जर निवासी महिपाल की नई पिकअप गाड़ी बुक की थी। गाड़ी में सवार श्रद्धालु हरिद्वार से दर्शन कर वापस लौट रहे थे। टक्कर इतनी जोरदार थी कि मौके पर ही तीन लोगों ने दम तोड़ दिया। मृतकों की पहचान इस प्रकार है:

  • रमेश मेघवाल (23): पेशे से इलेक्ट्रिशियन, जिनकी दो साल पहले ही शादी हुई थी।
  • रतन वाल्मीकि (22): परिवार के इकलौते बेटे, जो मजदूरी कर घर का खर्च चलाते थे।
  • सरजीत (40): पेशे से ड्राइवर, जो अपने पीछे पत्नी और दो मासूम बच्चों को छोड़ गए हैं।

अंधेरी रात में काल बनकर आया ट्रक

हादसे के प्रत्यक्षदर्शी राजेश फौजी ने बताया कि पिकअप चालक ने सामने से आ रहे अनियंत्रित ट्रक को देखकर गाड़ी को सड़क किनारे करने की पूरी कोशिश की और डिपर देकर संकेत भी दिए। इसके बावजूद ट्रक चालक ने अपनी गति धीमी नहीं की और पिकअप को सीधी टक्कर मार दी। पिकअप के ऊपर लोहे का चैंबर बना हुआ था, जिसमें सो रहे श्रद्धालु इस हादसे में सबसे अधिक प्रभावित हुए।

परिवारों पर टूटा दुखों का पहाड़

यह हादसा कई परिवारों के लिए जीवन भर का नासूर बन गया है। रमेश मेघवाल की पत्नी, जो खुद भी हादसे में गंभीर रूप से घायल हुई हैं, गर्भवती हैं। रमेश अपने परिवार का एकमात्र सहारा थे। वहीं, रतन वाल्मीकि के माता-पिता का पहले ही देहांत हो चुका था और उनकी मौत से परिवार की आखिरी उम्मीद भी खत्म हो गई है। सरजीत के निधन से उनके दो छोटे बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया है। गांव के लोग इस समय भारी गम में डूबे हैं और पीड़ित परिवारों को सांत्वना देने के लिए उनके घर पहुंच रहे हैं।