जोधपुर में भगवान जगन्नाथ की भव्य रथ यात्रा आज, 350 साल पुराने मंदिर से निकलेगा रथ
जोधपुर शहर आज पूरी तरह से भक्ति के रंग में रंगा हुआ है। शहर के विभिन्न इलाकों में आज भगवान जगन्नाथ की भव्य रथ यात्रा निकाली जाएगी। उत्सव का मुख्य केंद्र सुनारों की घाटी स्थित ऐतिहासिक जगदीश मंदिर है, जहाँ से रथ यात्रा का शुभारंभ होगा। इस आयोजन को लेकर भक्तों में भारी उत्साह देखने को मिल रहा है और शहर की सड़कों को विशेष रूप से सजाया गया है।
मंदिर के पुजारी गौरव गौड़ ने जानकारी देते हुए बताया कि भगवान जगन्नाथ के अलौकिक शृंगार के लिए विशेष तैयारियां की गई हैं। उन्होंने बताया कि प्रभु के लिए मुकुट और भव्य पोशाक खास तौर पर नाथद्वारा से मंगवाई गई है। इसके अलावा, पुरी स्थित जगन्नाथ मंदिर से पवित्र ध्वजा और चावल-भात का महाप्रसाद विशेष रूप से जोधपुर लाया गया है। रथ यात्रा के दौरान यही प्रसाद भक्तों के बीच वितरित किया जाएगा।
350 साल पुराना इतिहास और आकर्षण
इस मंदिर की महिमा निराली है। यह मंदिर करीब 350 साल पुराना बताया जाता है। पुजारी के अनुसार, उनके पूर्वज इस प्रतिमा को जगन्नाथ पुरी से जोधपुर लेकर आए थे। भगवान की प्रतिमा चंदन की लकड़ी से निर्मित है, जो इसे और भी दुर्लभ बनाती है। रथ यात्रा के लिए अजमेर से एक विशेष रथ मंगवाया गया है, जो सुनहरे रंग में चमक रहा है।
- रथ की सजावट: रथ को सजाने के लिए कोलकाता से 200 किलो ताजे फूल मंगवाए गए हैं।
- दिव्य शृंगार: भगवान का रूप नाथद्वारा के श्रीनाथजी के स्वरूप जैसा सजाया गया है।
- विशेष भोग: सुबह के समय भगवान को 121 किलो पंच मेवे का भोग अर्पित किया जाएगा।
रथ यात्रा का प्रस्तावित रूट और कार्यक्रम
आयोजन समिति ने रथ यात्रा के लिए एक विस्तृत मार्ग निर्धारित किया है। यह यात्रा सुनारों की घाटी से प्रारंभ होकर शहर के प्रमुख मार्ग घंटाघर तक जाएगी और अंत में पुनः जगदीश मंदिर पहुंचकर संपन्न होगी। यात्रा के समापन के बाद महाआरती का आयोजन होगा, जिसमें बड़ी संख्या में भक्तों के शामिल होने की उम्मीद है।
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| मंदिर की आयु | 350 वर्ष |
| फूलों की मात्रा | 200 किलो (कोलकाता से) |
| पंच मेवा भोग | 121 किलो |
| मुख्य आकर्षण | नाथद्वारा का विशेष शृंगार और रथ |
