राजस्थान में प्रसूताओं के लिए जानलेवा बन रहा ‘हेल्प’ (HELLP) सिंड्रोम, जानिए क्या हैं इसके लक्षण और बचाव
राजस्थान में इन दिनों सिजेरियन और नॉर्मल डिलीवरी के बाद प्रसूताओं की बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति और मौतों के मामले चिंता का विषय बने हुए हैं। कई मामलों में डिलीवरी के बाद महिलाओं में खून की भारी कमी देखी जा रही है, जिसका सीधा असर उनकी किडनी की कार्यप्रणाली पर पड़ रहा है।
चिकित्सकों का मानना है कि इन गंभीर समस्याओं के पीछे HELLP (हेल्प) सिंड्रोम मुख्य कारण है। यदि गर्भावस्था के दौरान इसकी सही समय पर स्क्रीनिंग न हो, तो स्थिति बिगड़ने पर सिजेरियन डिलीवरी ही एकमात्र विकल्प बचता है। जोधपुर के अस्पतालों में रेफर होकर आने वाली अधिकांश प्रसूताओं में यह सिंड्रोम बेहद सामान्य रूप से पाया गया है। इसमें अचानक ब्लड प्रेशर का बढ़ना, खून की कमी, प्लेटलेट्स में गिरावट और किडनी पर प्रतिकूल प्रभाव जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।
जोधपुर में हाल ही में एक प्रसूता की मौत इसी सिंड्रोम के कारण हुई, जो करीब 25 दिनों तक वेंटिलेटर पर थी। इसके अलावा, पाली से रेफर होकर आईं एक अन्य महिला का ब्लड प्रेशर अचानक बढ़ गया था, जिसके चलते उसे तुरंत डिलीवरी करानी पड़ी। इन सभी मामलों में एक समानता यह देखी गई कि डिलीवरी से पहले या बाद में ये प्रसूताएं गंभीर स्वास्थ्य जटिलताओं से जूझ रही थीं।
अचानक बढ़ा बीपी और वेंटिलेटर की नौबत
पाली से रेफर होकर आई एक प्रसूता के मामले में स्थिति तब बिगड़ गई जब उसे अत्यधिक ब्लीडिंग के साथ लीवर में सूजन की समस्या हुई। मरीज की गंभीर हालत को देखते हुए उसे वेंटिलेटर पर रखना पड़ा।
क्यों खतरनाक है यह सिंड्रोम?
- एएनसी (ANC) जांच में लापरवाही: डॉक्टरों का कहना है कि ज्यादातर मामलों में महिलाओं ने गर्भावस्था के दौरान नियमित एंटीनेटल चेकअप (एएनसी) नहीं कराए थे। समय पर स्क्रीनिंग न होने से गर्भावस्था के अंतिम चरणों में इस सिंड्रोम की पहचान हो पाती है।
- नियमित निगरानी की कमी: गर्भावस्था में ब्लड प्रेशर की लगातार मॉनिटरिंग सबसे महत्वपूर्ण है। अनदेखी करने पर यह सिंड्रोम किडनी, लीवर और ब्रेन जैसे अंगों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है।
- ब्लड सेल्स का टूटना: HELLP सिंड्रोम के चलते शरीर में लाल रक्त कोशिकाएं (RBC) तेजी से टूटने लगती हैं, जिससे खून और प्लेटलेट्स की भारी कमी हो जाती है। डिलीवरी के दौरान ब्लीडिंग को रोकना मुश्किल हो जाता है और कई बार जान बचाने के लिए गर्भाशय तक निकालना पड़ जाता है।
विशेषज्ञों की सलाह है कि गर्भावस्था के दौरान नियमित जांच और ब्लड प्रेशर पर कड़ी नजर रखना ही इस जानलेवा सिंड्रोम से बचाव का एकमात्र तरीका है। महिलाओं को किसी भी असामान्य लक्षण को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और तुरंत विशेषज्ञों से परामर्श लेना चाहिए।








