Prahlad Gunjal: कोटा बैठक से गायब रहे नेता, सरकार पर साधा निशाना

कोटा में कांग्रेस पार्टी की आंतरिक कलह एक बार फिर खुलकर सामने आ गई है। रविवार को महाराजा अग्रसेन धर्मशाला में कांग्रेस नेता प्रहलाद गुंजल द्वारा बुलाई गई बैठक में पार्टी के कई बड़े चेहरों की गैर-मौजूदगी ने संगठन में चल रहे मतभेदों पर मुहर लगा दी है। इस बैठक में शहर और ग्रामीण स्तर…

कोटा कांग्रेस में फिर दिखी गुटबाजी: प्रहलाद गुंजल की बैठक से नदारद रहे दिग्गज नेता

कोटा में कांग्रेस पार्टी की आंतरिक कलह एक बार फिर खुलकर सामने आ गई है। रविवार को महाराजा अग्रसेन धर्मशाला में कांग्रेस नेता प्रहलाद गुंजल द्वारा बुलाई गई बैठक में पार्टी के कई बड़े चेहरों की गैर-मौजूदगी ने संगठन में चल रहे मतभेदों पर मुहर लगा दी है। इस बैठक में शहर और ग्रामीण स्तर के जिला अध्यक्षों सहित कई विधायकों ने दूरी बनाए रखी, जिससे राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म है।

बैठक में किन नेताओं ने बनाई दूरी?

प्रहलाद गुंजल की ओर से आयोजित इस बैठक को ‘जिला कांग्रेस कमेटी’ की बैठक के रूप में प्रचारित किया गया था, लेकिन मुख्य पदाधिकारियों का न पहुंचना बड़ी चूक माना जा रहा है। अनुपस्थित रहने वाले प्रमुख नेताओं की सूची इस प्रकार है:

पदनाम
शहर जिलाध्यक्षराखी गौतम
देहात जिलाध्यक्षभानुप्रताप
पीपल्दा विधायकचेतन पटेल
प्रधान (लाडपुरा)नईमुद्दीन गुड्डू

हालांकि, इस कार्यक्रम में प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव और कोटा प्रभारी पुष्पेंद्र भारद्वाज, पूर्व शहर अध्यक्ष रविंद्र त्यागी और अमीन पठान जैसे नेता मौजूद रहे।

शासन पर गुंजल का तीखा प्रहार

बैठक के दौरान प्रहलाद गुंजल ने अपनी ही पार्टी के शीर्ष नेतृत्व और स्थानीय प्रशासन पर तंज कसते हुए कड़े सवाल उठाए। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि, “क्या आप शासन चला रहे हैं या साइकिल-रिक्शा-ठेला चला रहे हैं?” गुंजल ने स्पष्ट किया कि आने वाले दिनों में सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ कोटा में एक बड़ा आंदोलन छेड़ा जाएगा।

हाड़ौती के किसानों की बदहाली का उठाया मुद्दा

प्रहलाद गुंजल ने हाड़ौती क्षेत्र के किसानों की दयनीय स्थिति पर चिंता जताते हुए प्रशासन को आड़े हाथों लिया। उन्होंने प्रमुख रूप से निम्नलिखित समस्याओं को रेखांकित किया:

  • बिजली संकट: जिन क्षेत्रों में बोरिंग के जरिए सिंचाई हो रही है, वहां 8 से 10 घंटे की अघोषित बिजली कटौती की जा रही है।
  • खाद की कालाबाजारी: 1300-1400 रुपये कीमत वाला खाद का कट्टा किसानों को सरकारी दर पर नहीं मिल रहा है।
  • मजबूरी का फायदा: किसानों को ऊंचे दामों पर खाद खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा है, जो कि सीधे तौर पर कालाबाजारी है।

गुंजल ने कहा कि किसान ने बड़ी उम्मीदों के साथ धान की फसल बोई थी, लेकिन पानी और बिजली के अभाव में फसल सूख रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते प्रशासन ने व्यवस्थाओं में सुधार नहीं किया, तो कांग्रेस सड़कों पर उतरकर उग्र प्रदर्शन करने को मजबूर होगी।