Wedding: शादी की बाधाएं दूर करने के लिए जगन्नाथ मंदिर में उमड़ी भीड़

अलवर शहर के ऐतिहासिक सुभाष चौक स्थित भगवान श्रीजगन्नाथ मंदिर में गुरुवार को कंगन डोरे बांधने की पारंपरिक रस्म शुरू हो गई। यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है और इसे लेकर श्रद्धालुओं में गहरी आस्था है। मान्यता है कि जिन युवक-युवतियों के विवाह में अड़चनें आ रही हैं या विवाह तय होने में…

अलवर के श्रीजगन्नाथ मंदिर में कंगन डोरे बांधने की परंपरा शुरू, शीघ्र विवाह की कामना लेकर उमड़े श्रद्धालु

अलवर शहर के ऐतिहासिक सुभाष चौक स्थित भगवान श्रीजगन्नाथ मंदिर में गुरुवार को कंगन डोरे बांधने की पारंपरिक रस्म शुरू हो गई। यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है और इसे लेकर श्रद्धालुओं में गहरी आस्था है। मान्यता है कि जिन युवक-युवतियों के विवाह में अड़चनें आ रही हैं या विवाह तय होने में देरी हो रही है, वे यदि श्रद्धापूर्वक भगवान के दरबार में कंगन डोरा बंधवाते हैं, तो उनकी सभी बाधाएं दूर हो जाती हैं।

इस विशेष आयोजन की शुरुआत भगवान श्रीजगन्नाथ के 11 पवित्र नदियों के जल से किए गए भव्य जलाभिषेक के साथ हुई। अभिषेक के उपरांत प्रभु को नवीन वस्त्र धारण कराए गए और विधि-विधान से विशेष पूजा-अर्चना संपन्न हुई। इसके बाद मंदिर के पुजारियों ने भगवान को कंगन डोरा अर्पित किया और फिर श्रद्धालुओं के हाथों में डोरे बांधने का क्रम शुरू हुआ। सुबह से ही मंदिर परिसर में भक्तों की भारी भीड़ देखी गई।

व्यापार में उन्नति के लिए भी पहुंचते हैं भक्त

मंदिर के पुजारी पंडित पुष्पेंद्र शर्मा ने बताया कि यह परंपरा अब केवल विवाह की कामना तक सीमित नहीं है। अब जयपुर और भिवाड़ी सहित राजस्थान के कई शहरों से व्यापारी भी इस मंदिर में अपनी आस्था प्रकट करने आते हैं। व्यापारी वर्ग भगवान श्रीजगन्नाथ को अपने कारोबार का साझेदार मानते हैं और व्यवसाय में सफलता व निरंतर प्रगति के लिए विशेष पूजा-अर्चना करते हैं।

आगामी कार्यक्रमों की विस्तृत रूपरेखा

मंदिर प्रबंधन ने इस वर्ष के आयोजनों का पूरा विवरण साझा किया है, जो इस प्रकार है:

दिनांक कार्यक्रम का विवरण
18 जुलाई – 21 जुलाई मंदिर में अखंड संकीर्तन का आयोजन
21 जुलाई (शाम 6 बजे) सीतारामजी द्वारा विवाह स्थल का निरीक्षण
22 जुलाई भगवान का विशेष अभिषेक और श्रृंगार
22 जुलाई (शाम 6 बजे) सुभाष चौक से रूपबास तक भव्य रथयात्रा (बारात)

14 घंटे की ऐतिहासिक रथयात्रा

पंडित पुष्पेंद्र शर्मा ने बताया कि भगवान श्रीजगन्नाथ की आंखें सदैव खुली रहती हैं, जो इस बात का प्रतीक हैं कि वे अपने भक्तों पर निरंतर कृपा दृष्टि बनाए रखते हैं। 22 जुलाई को निकलने वाली भव्य रथयात्रा अलवर की सबसे प्रमुख धार्मिक परंपराओं में से एक है। 6 किलोमीटर लंबी यह यात्रा लगभग 14 घंटे में रूपबास स्थित मंदिर पहुंचती है। पूरे मार्ग पर हजारों श्रद्धालु प्रभु के दर्शन के लिए उमड़ते हैं, जिससे पूरा शहर भक्तिमय हो जाता है। भगवान स्वयं रथ पर सवार होकर अपने भक्तों को दर्शन देने के लिए नगर भ्रमण पर निकलते हैं, जो इस आयोजन का मुख्य आकर्षण होता है।


Exit mobile version