ओबीसी आरक्षण और चुनाव पर कैबिनेट मंत्री जोगाराम पटेल का बड़ा बयान
कैबिनेट मंत्री जोगाराम पटेल ने बाड़मेर दौरे के दौरान राज्य में ओबीसी आरक्षण और आगामी चुनावों को लेकर चल रहे विवाद पर स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि यदि कांग्रेस सार्वजनिक रूप से यह कहे कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार सरकार बिना ओबीसी आरक्षण के चुनाव कराए, तो सरकार इस पर विचार कर सकती है। हालांकि, मंत्री ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस कभी भी ओबीसी वर्ग को आरक्षण से वंचित रखने की बात नहीं कहेगी।
मंत्री ने कहा कि ओबीसी आयोग का गठन करना सरकार की जिम्मेदारी थी, जिसे पूरा कर लिया गया है। अब रिपोर्ट सौंपना आयोग का कार्य है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार चुनाव के लिए पूरी तरह तैयार है और जैसे ही चुनाव आयोग निर्देश देगा, प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। चुनाव आयोग एक स्वतंत्र निकाय है और सरकार उसकी हर गाइडलाइन का पालन करने के लिए प्रतिबद्ध है। हाईकोर्ट की टिप्पणियों पर उन्होंने कहा कि मामला कोर्ट में विचाराधीन है, इसलिए इसकी गरिमा बनाए रखते हुए इस पर कोई भी टिप्पणी करना उचित नहीं है।
बिना त्रि-स्तरीय जांच के राजनीतिक आरक्षण संभव नहीं
ओबीसी आरक्षण को लेकर मंत्री ने सुप्रीम कोर्ट के वर्ष 2021 के महाराष्ट्र केस के फैसले का हवाला दिया। उन्होंने बताया कि शीर्ष अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि राजनीतिक क्षेत्र में ओबीसी को आरक्षण देने से पहले राज्य सरकारों को त्रि-स्तरीय जांच (Triple Test) करानी अनिवार्य है।
- सुप्रीम कोर्ट के अनुसार, जांच के बिना राजनीतिक आरक्षण नहीं दिया जा सकता।
- पिछली सरकार ने 2021, 2022 और 2023 के दौरान ओबीसी आयोग का गठन तक नहीं किया था।
- मंत्री ने कहा कि अब यह कांग्रेस को तय करना है कि वे वास्तव में क्या चाहते हैं।
भ्रष्टाचार और तबादलों पर कांग्रेस को घेरा
तबादलों में पैसों के लेनदेन के आरोपों पर पलटवार करते हुए जोगाराम पटेल ने कहा कि कांग्रेस के कार्यकाल में भ्रष्टाचार चरम पर था। उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा का जिक्र करते हुए कहा कि एक सार्वजनिक कार्यक्रम में खुद गहलोत ने शिक्षाविदों से पूछा था कि क्या तबादलों में पैसे लिए जाते हैं? वहां मौजूद सभी शिक्षाविदों ने एक स्वर में इसकी पुष्टि की थी। मंत्री ने कहा कि कांग्रेस द्वारा लगाए जा रहे मौजूदा आरोप पूरी तरह से निराधार और राजनीति से प्रेरित हैं।
स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार और सुरक्षा का भरोसा
अस्पतालों में प्रसूताओं की मौतों के मामले पर मंत्री ने संवेदनशीलता दिखाते हुए कहा कि सरकार इन घटनाओं को स्वीकार करती है और यह चिंताजनक है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि अस्पतालों में आने वाले हर मरीज का प्रभावी इलाज सुनिश्चित किया जाएगा। उन्होंने कहा, “जहां भी व्यवस्थाओं में खामियां या लीकेज थे, उन्हें अब पूरी तरह दुरुस्त कर दिया जाएगा।”
बॉर्डर सुरक्षा और ऑपरेशन क्लीन पर सरकार का रुख
सीमावर्ती इलाकों में ‘ऑपरेशन क्लीन’ को लेकर मंत्री ने देश की सुरक्षा को सर्वोपरि बताया। उन्होंने कहा कि बॉर्डर के 50 किलोमीटर के दायरे में संदिग्ध गतिविधियों को रोकने के लिए प्रतिबंध लगाए गए हैं।
| मुद्दा | सरकार का पक्ष |
|---|---|
| अवैध निर्माण | पिछली सरकार ने तुष्टीकरण के चलते प्रतिबंधित क्षेत्रों में निर्माण होने दिया। |
| सुरक्षा इनपुट | गृहमंत्री अमित शाह के साथ हुई बैठक में संदिग्ध गतिविधियों की पुष्टि हुई। |
| हाईकोर्ट का फैसला | कोर्ट ने सरकार के कार्रवाई के अधिकार को सही माना और याचिका खारिज की। |
अंत में मंत्री ने कहा कि देश की सुरक्षा सबसे पहले है और सरकार इस दिशा में किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेगी। हाईकोर्ट ने भी सरकार के पक्ष को सही ठहराते हुए स्पष्ट कर दिया है कि सुरक्षा के मामलों में सरकार को कार्रवाई का पूरा अधिकार है।
