![]()
पाली के 250 साल पुराने महालक्ष्मी मंदिर में भव्य वार्षिकोत्सव और ध्वजारोहण
पाली के झालरवा स्थित ऐतिहासिक 250 साल पुराने महालक्ष्मी मंदिर का 20वां वार्षिकोत्सव पूरी श्रद्धा और उल्लास के साथ संपन्न हुआ। इस विशेष अवसर पर मंदिर परिसर में वैदिक रीति-रिवाजों के साथ ध्वजारोहण किया गया और भव्य धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए गए। कार्यक्रम के मुख्य आकर्षण में मंदिर के शिखर पर ध्वजा चढ़ाना शामिल रहा, जिसका सौभाग्य अमित कांतीलाल दवे परिवार को प्राप्त हुआ। इस आयोजन ने न केवल धार्मिक परंपराओं को जीवंत किया, बल्कि पूरे क्षेत्र में आस्था का एक नया संचार भी किया।
वैदिक मंत्रोच्चार और विशेष पूजा-अर्चना
वार्षिकोत्सव के दौरान आयोजित धार्मिक अनुष्ठानों की श्रृंखला में 15 विद्वान आचार्यों की उपस्थिति अत्यंत महत्वपूर्ण रही। पंडित संजय अवस्थी, विशाल जोशी और ओमदत्त दवे सहित अन्य विद्वानों के सान्निध्य में मां महालक्ष्मी, मां सरस्वती और मां काली की विधि-विधान से पूजा की गई। अनुष्ठान के दौरान गूंजते वैदिक मंत्रोच्चार ने वातावरण को पूरी तरह से आध्यात्मिक बना दिया। श्रीमाली समाज के पदाधिकारियों ने इस पूरे कार्यक्रम के सफल संचालन में अहम जिम्मेदारी निभाई, जिससे श्रद्धालुओं को दर्शन और पूजा में कोई असुविधा न हो।
रात्रि जागरण और भजनों की भक्तिमयी प्रस्तुति
उत्सव की पूर्व संध्या पर ब्रह्मपुरी और झालरवा स्थित दोनों महालक्ष्मी मंदिरों में रात्रि जागरण (रातिजगा) का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में स्थानीय महिलाओं की भागीदारी देखने लायक थी। कार्यक्रम की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:
- भजन संध्या: ब्रह्मपुरी मंदिर में जयश्री जोशी, ऊषा त्रिवेदी और संतोष व्यास सहित अनेक महिलाओं ने भक्ति गीतों की प्रस्तुति दी।
- सामूहिक सहभागिता: झालरवा मंदिर में निर्मल कांता दवे और अनिता त्रिवेदी के नेतृत्व में 150 से अधिक महिलाओं ने एक सुर में माता के भजनों का गुणगान किया।
- समाज का सहयोग: रविशंकर, योगेन्द्र ओझा, राकेश दवे और अभिषेक व्यास जैसे पदाधिकारियों ने व्यवस्थाओं को सुचारू बनाए रखने में अपना योगदान दिया।
इस अवसर पर समाज के गणमान्य नागरिक जैसे एडवोकेट पी.एम. जोशी, कमलेश दवे और कैलाश त्रिवेदी की उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा को बढ़ाया। यह वार्षिकोत्सव न केवल मंदिर के जीर्णोद्धार के बाद की एक उपलब्धि है, बल्कि यह क्षेत्र की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को संरक्षित करने की दिशा में भी एक बड़ा कदम है।









