कोटा में अतिक्रमण पर नगर निगम सख्त: 200 से अधिक कियोस्क धारकों को नोटिस, रोजगार छिनने का डर
कोटा नगर निगम ने शहर के प्रमुख व्यावसायिक इलाकों में संचालित 200 से अधिक कियोस्क धारकों को नोटिस जारी कर हड़कंप मचा दिया है। निगम प्रशासन ने इन संचालकों से उनके आवंटन संबंधी मूल दस्तावेज मांगे हैं। कार्रवाई का मुख्य आधार शहर की बिगड़ती ट्रैफिक व्यवस्था और लीज अवधि का समाप्त होना बताया जा रहा है। इस कदम से लंबे समय से इन कियोस्क के जरिए आजीविका चला रहे व्यापारियों में अपने रोजगार को लेकर अनिश्चितता और चिंता का माहौल है।
दो दशक पुरानी है आवंटन की कहानी
नगर निगम आयुक्त ओपी मेहरा के अनुसार, ये कियोस्क मुख्यमंत्री रोजगार गारंटी योजना के तहत साल 2000 से 2004 के बीच आवंटित किए गए थे। उस समय इनका आवंटन मुख्य रूप से गुमानपुरा जैसे व्यस्त व्यापारिक क्षेत्रों में किया गया था। इन आवंटनों की शर्तें निम्नलिखित थीं:
- समय सीमा: कियोस्क का आवंटन केवल 10 साल की लीज अवधि के लिए किया गया था।
- वर्तमान स्थिति: निर्धारित 10 साल की लीज अवधि काफी समय पहले समाप्त हो चुकी है।
- मुख्य समस्या: सड़क किनारे स्थित होने के कारण ये कियोस्क यातायात सुगम बनाने में बड़ी बाधा बन रहे हैं।
प्रशासन का रुख: रोजगार नहीं, व्यवस्था सुधारना प्राथमिकता
व्यापारियों के विरोध और चिंता के बीच नगर निगम आयुक्त ओपी मेहरा ने स्पष्ट किया है कि निगम का उद्देश्य किसी को बेरोजगार करना नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रशासन का मुख्य लक्ष्य शहर के विकास, यातायात की सुगमता और कानूनी नियमों के बीच एक संतुलन स्थापित करना है।
आयुक्त ने जानकारी दी कि निगम की टीमें वर्तमान में कियोस्क धारकों के साथ लगातार संपर्क में हैं और उनसे संवाद कर रही हैं। राज्य सरकार के दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए और जनसुविधा को ध्यान में रखकर इस मामले का समाधान आपसी सामंजस्य से निकालने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने आश्वासन दिया कि शहर के विकास कार्यों और छोटे व्यापारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए जल्द ही कोई ठोस निर्णय लिया जाएगा।










