राजस्थान की सियासत: स्पीकर की फिसली जुबान और गलियारों की चर्चाएं
नमस्कार, राजस्थान की राजनीति में कब क्या हो जाए, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है। हाल ही में विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी की जुबान फिसलने से सियासी गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया। इस फिसलन का असर कितना गहरा है, यह तो आने वाला वक्त बताएगा, लेकिन इसने उन नेताओं की धड़कनें जरूर बढ़ा दी हैं जो खुद को भावी मुख्यमंत्री के रूप में देखते हैं। इसके अलावा, राज्यसभा सांसद घनश्याम तिवाड़ी का पद से मोहभंग और स्वास्थ्य विभाग की भागदौड़ भी आज के मुख्य केंद्र बिंदु हैं। आइए जानते हैं, सत्ता और प्रशासन की इनसाइड स्टोरी।
1. स्पीकर का ‘स्लिप ऑफ टंग’ और सियासी मायने
विधानसभा के भीतर एक अजीब वाकया देखने को मिला जब अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने गलती से पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को ‘माननीय मुख्यमंत्री’ संबोधित कर दिया। उन्होंने कहा कि गहलोत साहब की तबीयत खराब है, इसलिए उनकी जगह सीपी जोशी शामिल होंगे। हालांकि, सत्ता पक्ष को इससे कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ, लेकिन इस बयान ने उन नेताओं को जरूर असहज कर दिया है जो खुद को सत्ता की अगली कतार में मान रहे हैं। अब चर्चा यह है कि क्या यह महज एक मानवीय भूल थी या फिर इसके पीछे कोई सोची-समझी रणनीति?
2. घनश्याम तिवाड़ी का ‘रिटायरमेंट मोड’
राजस्थान की राजनीति के दिग्गज नेता घनश्याम तिवाड़ी ने अपनी महत्वाकांक्षाओं को लेकर बड़ा बयान दिया है। सीकर में उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि अब उन्हें न तो किसी मंत्री पद की चाह है और न ही वे गवर्नर बनने की दौड़ में हैं। उन्होंने कहा कि राज्यसभा कार्यकाल पूरा होने के बाद वे अपना ध्यान सांस्कृतिक और सामाजिक कार्यों में लगाएंगे।
- सांगानेर में कभी उनका दबदबा हुआ करता था।
- मुख्यमंत्री पद की रेस में कभी उनका नाम प्रमुखता से लिया जाता था।
- अब वे नई पीढ़ी को स्थिर करने और अपने राजनीतिक मोह से मुक्त होने की बात कर रहे हैं।
3. स्वास्थ्य विभाग का हाल: ‘ब्रेक’ के बाद जवाब
प्रदेश के अस्पतालों में प्रसूताओं की मौत के मामले लगातार सामने आ रहे हैं, लेकिन सिस्टम का तर्क है कि सब कुछ ठीक चल रहा है। स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर लगातार अस्पतालों का दौरा कर रहे हैं और डॉक्टरों की क्लास लगा रहे हैं। स्थिति यह है कि मंत्री जी इतने व्यस्त हैं कि पत्रकारों को उनके जवाब के लिए भी ‘ब्रेक’ का इंतजार करना पड़ता है। विभाग का कहना है कि वे अत्याधुनिक सुविधाएं दे रहे हैं, लेकिन मरीजों की जटिल बीमारियों और कुपोषण के चलते मौतों को रोका जाना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
4. तबादलों की बाढ़ और ‘स्काई डाइविंग’ करती SHO
राज्य में इन दिनों तबादलों का दौर जारी है, जिससे हर विभाग में उथल-पुथल मची है। इसी कड़ी में जयपुर के वैशाली नगर थाने की SHO आरती तंवर का तबादला मानवाधिकार आयोग में कर दिया गया। सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय रहने वाली मैडम का एक AI जनरेटेड वीडियो खूब वायरल हो रहा है, जिसमें वे आसमान से स्काई डाइविंग करती नजर आ रही हैं। उन्होंने वीडियो के साथ लिखा कि ‘सीमाएं दिमाग में होती हैं, आसमान में नहीं।’ यह देखना दिलचस्प होगा कि अब मानवाधिकार आयोग में उनकी कार्यशैली कैसी रहती है।
| मुद्दा | मुख्य बिंदु |
|---|---|
| विधानसभा | स्पीकर की फिसली जुबान ने बढ़ाए सियासी सवाल। |
| घनश्याम तिवाड़ी | मंत्री और गवर्नर पद की इच्छा का त्याग। |
| स्वास्थ्य विभाग | लगातार दौरे, फिर भी प्रसूताओं की मौत पर सवाल। |
| तबादले | ब्यूरोक्रेसी में फेरबदल और वायरल रील की चर्चा। |
इनपुट सहयोग: स्वप्निल सक्सेना (सीकर), संजय पटेल (बांसवाड़ा), रिषभ सैनी (जयपुर)।
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