High Court: प्रशासक हटाने के आदेश पर रोक, अधिकारियों से मांगा जवाब

राजस्थान हाईकोर्ट ने बुधवार को ग्राम पंचायत बंथली के प्रशासक को पद से हटाने संबंधी 8 जुलाई को जारी किए गए आदेश पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। इस मामले में कोर्ट ने राज्य के पंचायती राज विभाग के प्रमुख सचिव, अतिरिक्त आयुक्त, टोंक कलेक्टर और टोंक जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी…

राजस्थान हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: ग्राम पंचायत बंथली के प्रशासक को हटाने के आदेश पर लगाई रोक

राजस्थान हाईकोर्ट ने बुधवार को ग्राम पंचायत बंथली के प्रशासक को पद से हटाने संबंधी 8 जुलाई को जारी किए गए आदेश पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। इस मामले में कोर्ट ने राज्य के पंचायती राज विभाग के प्रमुख सचिव, अतिरिक्त आयुक्त, टोंक कलेक्टर और टोंक जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। न्यायाधीश आनंद शर्मा की एकलपीठ ने यह महत्वपूर्ण निर्देश टोंक जिले की देवली पंचायत समिति के निवर्तमान सरपंच और प्रशासक श्याम सिंह राजावत द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान दिए।

मिलीभगत और पट्टा जारी करने का है मामला

याचिकाकर्ता श्याम सिंह राजावत के अधिवक्ता लक्ष्मीकांत शर्मा (मालपुरा) ने कोर्ट को बताया कि उनके मुवक्किल 22 जनवरी 2020 को ग्राम पंचायत के सरपंच निर्वाचित हुए थे। कार्यकाल पूरा होने के बाद, 20 जनवरी 2025 को टोंक कलेक्टर द्वारा उन्हें ग्राम पंचायत का प्रशासक नियुक्त किया गया था। इस बीच, पंचायत की एक ग्रामीण महिला द्वारा शिकायत दर्ज कराई गई थी, जिसमें आरोप लगाया गया कि प्रशासक ने मिलीभगत कर नियमों के विरुद्ध पट्टा जारी किया है।

मामले का घटनाक्रम

दिनांक प्रमुख घटना
22 जनवरी 2020 श्याम सिंह राजावत सरपंच निर्वाचित हुए
20 जनवरी 2025 प्रशासक के रूप में नियुक्ति
8 जून 2026 जांच कमेटी द्वारा रिपोर्ट जिला परिषद को सौंपी गई
8 जुलाई 2026 राज्य सरकार द्वारा प्रशासक को पदमुक्त करने का आदेश

कानूनी प्रक्रिया का उल्लंघन करने का आरोप

याचिका में मुख्य रूप से यह तर्क दिया गया है कि राज्य सरकार ने बिना सुनवाई का उचित अवसर दिए 8 जुलाई 2026 को प्रशासक को पद से हटा दिया। याचिकाकर्ता के अनुसार, उन्हें पद से हटाने की प्रक्रिया में पंचायती राज अधिनियम की धारा 38 और पंचायतीराज नियम के नियम 22 का पालन नहीं किया गया है। याचिका में इसे पूरी तरह से गैरकानूनी और अवैध करार देते हुए चुनौती दी गई है। फिलहाल हाईकोर्ट के इस आदेश से प्रशासक को बड़ी राहत मिली है और अब संबंधित अधिकारियों को कोर्ट में अपना पक्ष रखना होगा।


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