पांचना बांध: 20 साल की ‘पानी की जंग’ का अंत, 74 गांवों की उम्मीदों को मिली नई उड़ान
राजस्थान का पांचना बांध, जो पांच प्रमुख नदियों के संगम से बना है, पिछले दो दशकों से एक बड़े विवाद का केंद्र बना हुआ था। यह बांध न केवल मिट्टी से बनी संरचना के लिए जाना जाता है, बल्कि 74 गांवों के बीच पानी के बंटवारे को लेकर चले लंबे संघर्ष के लिए भी चर्चा में रहा है। जब भी बांध के गेट खोलने की बात आती, तो 39 गांव इसके विरोध में और 35 गांव इसके समर्थन में खड़े हो जाते थे। हालांकि, अब यह कड़वाहट खत्म होती दिख रही है। हाल ही में बांध के सभी 7 गेट खुलने के बाद दैनिक भास्कर की टीम ने मौके पर जाकर उन किसानों से बात की, जिनकी जिंदगी इसी पानी की जंग के इर्द-गिर्द सिमट गई थी।
जीने लायक पानी के लिए संघर्ष
करौली जिले के गुड़ला गांव में स्थित पांचना बांध के आसपास का माहौल अब बदला हुआ है। संघर्ष समिति के सदस्य भानूप्रताप के अनुसार, बांध के नजदीक होने के बावजूद यहां के किसान पानी की भारी किल्लत से जूझ रहे थे। भानूप्रताप बताते हैं, “हमारी लड़ाई किसी से नहीं थी, हम बस जीने लायक पानी चाहते थे। तीन-तीन पीढ़ियां कर्ज में डूब गईं, क्योंकि सिंचाई के लिए पानी नहीं मिला।” सरकार ने चंबल का पानी लाने और लिफ्ट परियोजना के वादे तो किए, लेकिन लाभ केवल 13 गांवों तक ही सीमित रह गया। अब सरकार ने सितंबर तक लिफ्ट परियोजना का वर्क ऑर्डर जारी करने का भरोसा दिया है, जिससे ग्रामीणों में नई उम्मीद जगी है।
राजनीति और भाईचारे का द्वंद्व
स्थानीय बुजुर्ग भरत सिंह का मानना है कि इस विवाद को जानबूझकर जातिगत रंग दिया गया। उन्होंने कहा, “यह गुर्जर बनाम मीणा की लड़ाई नहीं, बल्कि पानी की जरूरत की लड़ाई थी। नेता आते हैं, लोगों को भड़काते हैं और फिर वही समझौता कराने का ढोंग करते हैं।” भरत सिंह ने यह भी जोड़ा कि बांध बनने से भूजल स्तर तो बढ़ा, लेकिन विस्थापित किसानों को सिंचाई का पूरा हक आज तक नहीं मिला।
पानी के बंटवारे का गणित और विवाद की जड़
| पक्ष | गांवों की संख्या | मांग/स्थिति |
|---|---|---|
| बांध के निकटवर्ती गांव | 39 | लिफ्ट सिंचाई परियोजना और पर्याप्त पानी की मांग। |
| कमांड एरिया के गांव | 35 | नहरों में नियमित पानी और सिंचाई का अधिकार। |
सरकारी ‘सौगात’ या नाली?
गुड़ला गांव में बनी लिफ्ट नहर की हकीकत बेहद चौंकाने वाली है। किसानों ने बताया कि कागजों पर बनी यह नहर जमीन पर महज एक नाली जैसी है। नहर का स्तर खेतों से नीचे होने के कारण पानी खेतों तक पहुंच ही नहीं पाता। युवा किसान सुदामा गुर्जर ने इसे सरकारी लापरवाही करार देते हुए कहा कि यह केवल खानापूर्ति के लिए बनाई गई थी, जिसका कोई लाभ किसानों को नहीं मिला। अब सरकार ने भी इस पुरानी योजना की खामियों को स्वीकार कर लिया है।
कमांड एरिया में 20 साल बाद लौटी उम्मीद
सवाई माधोपुर जिले के कमांड एरिया में आने वाले 35 गांवों के किसानों के लिए अब राहत की खबर है। खंडीप गांव के किसान बृजभूषण मीणा बताते हैं कि दो दशक के लंबे इंतजार के बाद नहरों में पानी आने से बंजर होती जमीन फिर से लहलहा उठेगी। इससे न केवल पैदावार बढ़ेगी, बल्कि पलायन कर रहे युवाओं को अपने ही खेत में रोजगार मिल सकेगा।
- विवाद की शुरुआत: 2006 में 39 गांवों ने बांध से नहरों में पानी छोड़े जाने का विरोध किया था।
- मुख्य मांग: स्थानीय किसानों ने गुड़ला लिफ्ट सिंचाई परियोजना को प्राथमिकता देने की मांग रखी थी।
- वर्तमान स्थिति: चंबल का पानी पांचना बांध तक लाने के लिए सर्वे का काम शुरू हो चुका है, जो एक सकारात्मक संकेत है।
पांचना जल विवाद का यह लंबा सफर अब एक मोड़ पर खड़ा है। क्या अगले 18 महीनों में लिफ्ट परियोजना पूरी हो पाएगी? और क्या यह 74 गांवों की प्यास बुझा पाएगा? इन सवालों के जवाब भविष्य की राजनीति और प्रशासनिक इच्छाशक्ति पर निर्भर करेंगे।










