राजस्थान विधानसभा: संविदा कर्मियों के नियमितीकरण पर सरकार का बड़ा बयान
राजस्थान के खैरथल जिले के किशनगढ़बास विधानसभा क्षेत्र से विधायक दीपचंद खैरिया ने राज्य विधानसभा में संविदा कर्मचारियों के भविष्य को लेकर एक महत्वपूर्ण सवाल उठाया था। इस अतारांकित प्रश्न के जरिए विधायक ने यह जानने का प्रयास किया कि क्या सरकार लंबे समय से कार्यरत संविदा कर्मियों को नियमित करने की कोई योजना बना रही है। इस पर सरकार की ओर से स्पष्ट रुख सामने आया है।
नियमितीकरण पर सरकार ने क्या कहा?
विधायक के सवाल का लिखित जवाब देते हुए संयुक्त शासन सचिव मुन्नी मीणा ने साफ कर दिया कि वर्तमान में सरकार के पास संविदा कर्मियों को नियमित करने या उन्हें किसी अन्य पद पर समायोजित करने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। सरकार के इस जवाब से प्रदेश के हजारों संविदा कर्मियों को बड़ा झटका लगा है जो लंबे समय से स्थायी नौकरी की उम्मीद लगाए बैठे थे।
सरकारी एजेंसी के गठन पर चल रहा मंथन
हालांकि, सरकार ने राहत की एक छोटी उम्मीद जरूर जगाई है। जवाब में यह स्पष्ट किया गया है कि वर्तमान में जो कर्मचारी निजी प्लेसमेंट एजेंसियों के माध्यम से काम कर रहे हैं, उन्हें हटाने के बजाय एक सरकारी एजेंसी के जरिए सेवाएं लेने की संभावनाओं पर विचार किया जा रहा है। सरकार का मानना है कि इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और कर्मचारियों का शोषण कम होगा।
विधायक को सौंपा गया था ज्ञापन
आपको बता दें कि विधानसभा सत्र शुरू होने से ठीक पहले संविदा कर्मियों का एक प्रतिनिधिमंडल विधायक दीपचंद खैरिया से मिला था। कर्मचारियों ने अपनी समस्याओं से उन्हें अवगत कराया और एक ज्ञापन सौंपा था। प्रतिनिधिमंडल ने आग्रह किया था कि उनकी मांगों को सदन में जोर-शोर से उठाया जाए, जिसके बाद ही विधायक ने यह मुद्दा विधानसभा में रखा था।
विभिन्न विभागों में कार्यरत हैं हजारों कर्मचारी
राज्य के कई सरकारी विभागों में बड़ी संख्या में कर्मचारी वर्षों से कार्यरत हैं। इन कर्मचारियों की स्थिति को समझने के लिए नीचे दी गई तालिका देखें:
| विवरण | वर्तमान स्थिति |
|---|---|
| प्रमुख विभाग | समग्र शिक्षा अभियान (समसा) सहित अन्य विभाग |
| नियुक्ति का माध्यम | निजी प्लेसमेंट एजेंसियां |
| प्रमुख मांग | स्थायीकरण (नियमितीकरण) |
| सरकारी रुख | फिलहाल कोई योजना नहीं |
गौरतलब है कि समसा सहित कई सरकारी विभागों में निजी एजेंसियों के माध्यम से सेवाएं दे रहे इन कर्मचारियों की सेवा शर्तें और भविष्य लंबे समय से चर्चा का विषय बना हुआ है। अब देखना यह होगा कि सरकारी एजेंसी के गठन की योजना कब तक धरातल पर उतरती है।










