जिले में नशे के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’: कलेक्टर ने दिए सख्त कार्रवाई के निर्देश
जिले में मादक पदार्थों के बढ़ते खतरे को रोकने और युवा पीढ़ी को सुरक्षित रखने के लिए जिला प्रशासन ने कमर कस ली है। बुधवार को जिला कलेक्टर हरफूल सिंह यादव की अध्यक्षता में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक में नशे के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाते हुए पुलिस, चिकित्सा और वाणिज्यिक कर विभाग को व्यापक अभियान चलाने के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। कलेक्टर ने अवैध कारोबार में लिप्त तत्वों के खिलाफ त्वरित और कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा है।
शैक्षणिक संस्थानों पर विशेष निगरानी
बैठक में कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि नशे की रोकथाम के लिए खुफिया तंत्र को और अधिक मजबूत किया जाएगा। विशेष रूप से स्कूल और कॉलेजों के आसपास सक्रिय ड्रग्स सप्लायरों को चिह्नित कर उन पर कड़ी पाबंदी लगाने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन ने ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में नशे के नेटवर्क को तोड़ने के लिए निम्नलिखित रणनीतियों पर जोर दिया है:
- संयुक्त अभियान: पुलिस और चिकित्सा विभाग द्वारा नशीली दवाओं के विक्रेताओं के खिलाफ विशेष साझा अभियान चलाया जाएगा।
- नियमित नाकाबंदी: तस्करी रोकने के लिए शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में पुलिस की नियमित चेकिंग और नाकाबंदी बढ़ाई जाएगी।
- अवैध खेती पर प्रहार: सरकारी संपत्ति या वन भूमि पर गांजा, भांग या अफीम की खेती पाए जाने पर संबंधितों के विरुद्ध तुरंत कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
- जागरूकता: तंबाकू और अन्य मादक पदार्थों के दुष्प्रभावों को लेकर जन-जागरूकता कार्यक्रमों का व्यापक स्तर पर आयोजन किया जाएगा।
जवाबदेही तय करने के निर्देश
जिला कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि नशा मुक्ति अभियान को केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित न रखकर इसे जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि ड्रग्स परिवहन की सूचना मिलने पर पुलिस को बिना देरी के कार्रवाई करनी होगी। इस महत्वपूर्ण बैठक में जिला पुलिस अधीक्षक अवनीश कुमार शर्मा और अतिरिक्त जिला कलेक्टर रमेश देव सहित संबंधित विभागों के अन्य उच्चाधिकारी मौजूद रहे। प्रशासन ने आम जनता से भी अपील की है कि नशे के अवैध कारोबार से जुड़ी किसी भी गतिविधि की जानकारी तुरंत संबंधित विभाग को दें।










