Explainer: खुदाई में मिला खजाना किसका, मालिक का या सरकार का?


हाल ही में जयपुर में एक पुरानी हवेली की खुदाई के दौरान खजाना मिलने की खबर ने सनसनी फैला दी है। हवेली मालिक का आरोप है कि खुदाई करने वाले ठेकेदार और उसके सहयोगियों ने मिलकर करीब 40-45 किलो चांदी की सिल्लियां, सोने के सिक्कों से भरे 14-15 कलश और हजारों की संख्या में चांदी…

जयपुर हवेली खजाना मामला: खुदाई में मिले धन पर किसका है हक? जानिए क्या कहता है कानून

हाल ही में जयपुर में एक पुरानी हवेली की खुदाई के दौरान खजाना मिलने की खबर ने सनसनी फैला दी है। हवेली मालिक का आरोप है कि खुदाई करने वाले ठेकेदार और उसके सहयोगियों ने मिलकर करीब 40-45 किलो चांदी की सिल्लियां, सोने के सिक्कों से भरे 14-15 कलश और हजारों की संख्या में चांदी के प्राचीन सिक्के आपस में बांट लिए हैं। इस घटना के बाद से ही जमीन से निकलने वाले खजाने को लेकर कानूनी बहस छिड़ गई है।

इस घटना से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल

  • क्या पुश्तैनी जमीन से निकला खजाना कानूनी रूप से मालिक का होता है?
  • खजाने के दावेदारों की पहचान और जांच की प्रक्रिया क्या है?
  • प्रशासन को खजाने की सूचना देना अनिवार्य क्यों है?

इस रिपोर्ट के जरिए हम आपको गड़े हुए खजाने से जुड़े कानूनी पहलुओं और सरकारी नियमों की विस्तृत जानकारी दे रहे हैं।

सवाल: क्या घर या पुश्तैनी जमीन में मिला खजाना आपका हो जाता है?

जवाब: यदि आपको अपनी जमीन की खुदाई में सैकड़ों साल पुराना खजाना मिलता है, तो भी वह स्वतः आपका नहीं हो जाता। ‘इंडियन ट्रेजर ट्रोव एक्ट, 1878’ के अनुसार, ऐसी किसी भी वस्तु की जानकारी तुरंत स्थानीय प्रशासन या कलेक्टर को देना अनिवार्य है। कानूनन, जमीन के भीतर मिला धन सरकार के अधीन आता है।

सवाल: खजाने पर कानूनी हक किसका होता है?

जवाब: पूरे भारत में ‘इंडियन ट्रेजर ट्रोव एक्ट, 1878’ प्रभावी है, वहीं राजस्थान में इसे लागू करने के लिए ‘इंडियन ट्रेजर ट्रोव रूल्स 1961’ का पालन किया जाता है। इन नियमों के तहत गड़े हुए खजाने पर पहला हक राज्य सरकार का माना जाता है।

सवाल: क्या कोई व्यक्ति अपना दावा पेश कर सकता है?

जवाब: हां, यदि कोई व्यक्ति यह कानूनी रूप से साबित कर दे कि वह खजाना उसके पूर्वजों का है, तो सरकार उसे वह खजाना सौंप सकती है। इसके लिए ठोस दस्तावेजों और कानूनी जांच की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है।

खजाने के दावेदारों की जांच प्रक्रिया

जब भी खजाना मिलता है, उसे सरकारी खजाने (ट्रेजरी) में सुरक्षित रखा जाता है। इसके बाद कलेक्टर निम्नलिखित प्रक्रिया अपनाते हैं:

  • सार्वजनिक नोटिस: कलेक्टर एक सार्वजनिक नोटिस जारी करते हैं, जिसमें दावेदारों को प्रमाण के साथ पेश होने का समय (4 से 6 महीने) दिया जाता है।
  • जांच: यदि कोई अपना दावा साबित कर देता है, तो उसे खजाना वापस मिल सकता है।
  • लावारिस घोषित होना: यदि कोई भी दावेदार सामने नहीं आता, तो खजाने को लावारिस मानकर सरकारी संपत्ति घोषित कर दिया जाता है।

खजाने के बंटवारे का नियम

खजाने की स्थितिहकदार
100 साल से अधिक पुराना (ऐतिहासिक)पूर्णतः सरकार (पुरातत्व विभाग)
100 साल से कम पुरानाखोजने वाले को 75% और मालिक को 25% (यदि कोई अन्य दावेदार न हो)

सवाल: यदि खजाना 100 साल से अधिक पुराना हो तो क्या होगा?

जवाब: यदि खजाना ऐतिहासिक महत्व का है और 100 साल से अधिक पुराना पाया जाता है, तो ‘एंटीक्विटी एंड आर्ट वैल्यूएबल्स एक्ट 1972’ के तहत इसे सरकारी धरोहर माना जाता है। इसे किसी भी निजी व्यक्ति को नहीं दिया जा सकता।

सवाल: प्रशासन को जानकारी देना क्यों जरूरी है?

जवाब: कानून के अनुसार, 10 रुपये से अधिक मूल्य की कोई भी प्राचीन वस्तु मिलने पर उसकी सूचना प्रशासन को देना अनिवार्य है। यदि खजाना सरकारी जमीन पर मिलता है, तो वह पूरी तरह सरकार का होता है। यदि कोई व्यक्ति बिना सूचना दिए खजाना छिपाता है या अपने पास रखता है, तो उसे सख्त कानूनी कार्रवाई और सजा का सामना करना पड़ सकता है।