अचल संपत्ति का ब्योरा न देने वाले ढाई लाख कर्मचारियों पर गिरी गाज, रुकी वार्षिक वेतन वृद्धि
सरकारी कर्मचारियों के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है। राज्य सरकार ने उन ढाई लाख से अधिक कर्मचारियों की वार्षिक वेतन वृद्धि (इंक्रीमेंट) पर रोक लगा दी है, जिन्होंने 1 जनवरी, 2026 की स्थिति के अनुसार अपनी अचल संपत्ति का विवरण विभाग को नहीं सौंपा था। कार्मिक विभाग के सख्त रुख के बाद अब इन कर्मचारियों को जुलाई महीने से मिलने वाला इंक्रीमेंट नहीं मिल पाएगा।
सामान्य प्रक्रिया के तहत, हर साल जुलाई के पहले 10 दिनों में वेतन वृद्धि के आदेश जारी कर दिए जाते हैं। चूंकि अब तक इन कर्मचारियों के लिए कोई आदेश जारी नहीं हुआ है, इसलिए जुलाई के वेतन बिलों में उन्हें 3 प्रतिशत की वार्षिक वेतन वृद्धि का लाभ नहीं मिलेगा।
क्या है पूरा मामला और विभाग का आदेश?
कार्मिक विभाग (DOP) ने 31 दिसंबर, 2025 को एक आधिकारिक आदेश जारी कर सभी सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को 31 जनवरी, 2026 तक अपनी अचल संपत्ति का ब्योरा (IPR) अनिवार्य रूप से जमा करने का निर्देश दिया था। विभाग के आंकड़ों के अनुसार, करीब 2 लाख 64 हजार 913 अधिकारियों और कर्मचारियों ने इस समय सीमा के भीतर अपना विवरण नहीं भरा।
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| अंतिम तिथि | 31 जनवरी, 2026 |
| डिफॉल्टर कर्मचारियों की संख्या | 2,64,913 |
| वार्षिक वेतन वृद्धि | 3 प्रतिशत |
जवाबदेही तय करने के लिए सरकार सख्त
कार्मिक विभाग के संयुक्त सचिव धीरज कुमार ने स्पष्ट किया है कि सरकार अब नियमों के साथ कोई समझौता करने के मूड में नहीं है। उन्होंने कहा, “यदि हम इस बार ढिलाई बरतते हैं, तो कर्मचारी अगले साल भी ब्योरा देने में लापरवाही करेंगे। सरकार व्यवस्था में सुधार लाना चाहती है और उच्च स्तर से स्पष्ट निर्देश हैं कि जिन्होंने संपत्ति का ब्योरा नहीं दिया, उनकी वेतन वृद्धि रोक दी जाए।”
- प्रशासनिक जवाबदेही: सरकार सरकारी तंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना चाहती है।
- नियमों का पालन: आईपीआर (अचल संपत्ति विवरण) जमा करना एक अनिवार्य विभागीय प्रक्रिया है।
- भविष्य की चेतावनी: यह कदम अन्य कर्मचारियों के लिए भी एक कड़ा संदेश है।
कर्मचारी संगठनों में नाराजगी
इस फैसले का कर्मचारी संगठनों ने विरोध शुरू कर दिया है। कर्मचारी नेता गजेंद्र सिंह राठौड़ का कहना है कि सरकार को उन कर्मचारियों को एक और मौका देना चाहिए था, जो अन्य सरकारी कार्यों में व्यस्त होने के कारण अपना विवरण समय पर नहीं भर पाए। उन्होंने कहा कि वार्षिक वेतन वृद्धि रोकना कर्मचारियों के लिए एक बड़ा झटका है और सरकार को इस पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करना चाहिए था।
फिलहाल, जिन कर्मचारियों ने अपना विवरण सार्वजनिक नहीं किया है, उनकी फाइलें रुकी हुई हैं। अब देखना यह है कि क्या सरकार इन कर्मचारियों को कोई राहत देती है या फिर उन्हें अपनी लापरवाही का खामियाजा भुगतना पड़ेगा।
