Amayra केस: 8 महीने बाद चार्जशीट में खुलासा, टीचर की लापरवाही और सबूत मिटाने का खेल

जयपुर के प्रतिष्ठित नीरजा मोदी स्कूल में 1 नवंबर 2025 को हुई छात्रा अमायरा की दुखद मौत के मामले में 8 महीने की लंबी जांच के बाद पुलिस ने चार्जशीट दाखिल कर दी है। इस मामले ने न केवल स्कूल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं, बल्कि बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं…

जयपुर नीरजा मोदी स्कूल अमायरा सुसाइड केस: 8 महीने बाद चार्जशीट में खुला लापरवाही का काला सच

जयपुर के प्रतिष्ठित नीरजा मोदी स्कूल में 1 नवंबर 2025 को हुई छात्रा अमायरा की दुखद मौत के मामले में 8 महीने की लंबी जांच के बाद पुलिस ने चार्जशीट दाखिल कर दी है। इस मामले ने न केवल स्कूल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं, बल्कि बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं भी पैदा कर दी हैं। पुलिस की जांच रिपोर्ट में स्कूल की ओर से की गई घोर लापरवाही और सबूत मिटाने के प्रयास का खुलासा हुआ है।

चार्जशीट के अनुसार, घटना से एक दिन पहले ही अमायरा बुलिंग (धमकाने) का शिकार हो रही थी। वह अपनी व्यथा बताने के लिए तीन बार क्लास टीचर के पास गई थी, लेकिन उसे कोई राहत नहीं मिली। अगले दिन भी वह बार-बार मदद के लिए गुहार लगाती रही, लेकिन स्कूल प्रशासन मूकदर्शक बना रहा।

अमायरा की मौत: स्कूल की ‘ड्यूटी ऑफ केयर’ में बड़ी चूक

पुलिस जांच में यह बात सामने आई है कि घटना के दिन अमायरा 5 बार अपनी क्लास टीचर पुनिता शर्मा के पास गई थी। उसके मानसिक तनाव के संकेत साफ थे, लेकिन टीचर ने उसे पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया। पुलिस ने इसे ‘ड्यूटी ऑफ केयर’ (Duty of Care) का गंभीर उल्लंघन माना है।

  • टीचर की संवेदनहीनता: जब अन्य छात्रों ने टीचर को बताया कि अमायरा छत से गिर गई है, तब भी टीचर क्लास में ही बैठी रही। उसने कोई तत्काल प्रतिक्रिया नहीं दी, जो उसकी संवेदनहीनता को दर्शाता है।
  • सबूत मिटाने की कोशिश: घटना के बाद स्कूल प्रशासन ने मौके से खून के धब्बे साफ कर दिए थे। पुलिस के पहुंचने से पहले ही साक्ष्यों को नष्ट करने की कोशिश की गई।
  • सीसीटीवी में खामियां: सीबीएसई की गाइडलाइन के विपरीत, स्कूल के सीसीटीवी कैमरों में वॉयस रिकॉर्डिंग नहीं थी, जिससे घटना के वक्त हुई बातचीत का पता नहीं चल सका।

मामले में आरोपी और कानूनी स्थिति

पुलिस ने इस मामले में क्लास टीचर, स्कूल संस्थापक और प्रिंसिपल को आरोपी बनाया है। सभी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 238 (सबूत मिटाने) के तहत मामला दर्ज किया गया है।

आरोपीमुख्य आरोप
क्लास टीचरड्यूटी ऑफ केयर में लापरवाही और जुवेनाइल जस्टिस एक्ट की धारा 75।
संस्थापक व प्रिंसिपलसाक्ष्यों से छेड़छाड़ और सुपरवाइजरी नेग्लीजेंसी (धारा 106, 238)।

परिजनों का आरोप: जांच में बरती गई ढिलाई

अमायरा के पिता विजय मीणा ने पुलिस की चार्जशीट पर असंतोष जताया है। उनका आरोप है कि 8 महीने की लंबी जांच के बावजूद पुलिस ने आरोपियों पर धाराएं काफी कमजोर लगाई हैं। उन्होंने कहा, “स्कूल प्रबंधन ने बच्ची को आत्महत्या के लिए मजबूर किया। स्कूल के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। हम इस मामले को हाईकोर्ट तक लेकर जाएंगे।”

पुलिस जांच के मुख्य बिंदु:

  • घटना के समय अमायरा स्कूल की कानूनी देखरेख में थी।
  • स्कूल में एंटी-बुलिंग कमेटी जैसी कोई प्रभावी व्यवस्था नहीं थी।
  • घटना के बाद स्कूल प्रशासन ने पुलिस और शिक्षा विभाग को कई घंटों तक अंदर नहीं आने दिया।

फिलहाल, मामले की सुनवाई अदालत में शुरू होनी है। परिजनों की मांग है कि स्कूल संस्थापक और प्रिंसिपल पर भी जुवेनाइल जस्टिस एक्ट की सख्त धाराएं लगाई जाएं, क्योंकि स्कूल परिसर में बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रबंधन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।