Protest: श्रीगंगानगर में कचरा प्लांट के खिलाफ हजारों लोग सड़कों पर उतरे


राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले के नरसिंहपुरा बारानी और मांझूवास गांव में प्रस्तावित कचरा प्लांट के खिलाफ ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा है। सोमवार को स्थानीय निवासियों ने एक विशाल आक्रोश रैली निकालकर प्रशासन के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया। मांझूवास से शुरू हुई यह रैली करीब 6 किलोमीटर का सफर तय करते हुए नरसिंहपुरा बारानी…

श्रीगंगानगर: कचरा प्लांट के विरोध में उमड़ा जनसैलाब, ग्रामीणों ने दी बड़े आंदोलन की चेतावनी

राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले के नरसिंहपुरा बारानी और मांझूवास गांव में प्रस्तावित कचरा प्लांट के खिलाफ ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा है। सोमवार को स्थानीय निवासियों ने एक विशाल आक्रोश रैली निकालकर प्रशासन के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया। मांझूवास से शुरू हुई यह रैली करीब 6 किलोमीटर का सफर तय करते हुए नरसिंहपुरा बारानी स्थित गौशाला तक पहुंची। इस प्रदर्शन में लगभग 2,000 ग्रामीण शामिल हुए, जिसमें महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों की भागीदारी ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा

प्रदर्शनकारी ग्रामीणों का कहना है कि कचरा प्लांट का निर्माण उनके जीवन और आजीविका के लिए घातक साबित होगा। ग्रामीणों ने अपनी चिंताओं को प्रमुखता से रखा है:

  • प्रदूषण का डर: प्लांट के कारण इलाके में भारी बदबू, मक्खी-मच्छर और जहरीली गैसों का प्रसार होगा।
  • स्वास्थ्य पर असर: प्रदूषण से बच्चों और मवेशियों की सेहत बिगड़ने का गंभीर खतरा है।
  • उपजाऊ भूमि: ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन ने उपजाऊ कृषि भूमि को कचरा डंपिंग के लिए चुना है, जबकि वैकल्पिक जमीनें उपलब्ध हैं।
  • पर्यावरण असंतुलन: हवा और पानी की गुणवत्ता खराब होने से स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र नष्ट हो जाएगा।

प्रशासन की चुप्पी से बढ़ता जा रहा है आक्रोश

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि वे लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर ज्ञापन सौंप रहे हैं और बैठकें कर रहे हैं, लेकिन जिला प्रशासन अब तक “कुंभकर्णी नींद” सोया हुआ है। इससे पहले भी ग्रामीणों ने अपना विरोध जताने के लिए गांव के सरकारी स्कूलों को बंद कर विरोध दर्ज कराया था, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

क्रम संख्या मुख्य मांगें/पहलु
1 प्रस्तावित कचरा प्लांट को तुरंत रद्द किया जाए।
2 वैकल्पिक स्थानों पर प्लांट शिफ्ट करने की संभावना तलाशी जाए।
3 जनभावनाओं का सम्मान करते हुए प्रशासन लिखित आश्वासन दे।

भविष्य की रणनीति: बड़े आंदोलन की तैयारी

रैली के आयोजकों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने उनकी मांगों को नजरअंदाज करना जारी रखा, तो यह छोटा विरोध जल्द ही एक बड़े जन-आंदोलन का रूप ले लेगा। ग्रामीणों ने स्पष्ट कर दिया है कि वे अपनी जमीन, हवा और पानी को बचाने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं। आगामी दिनों में धरना-प्रदर्शन, सरकारी कार्यालयों का घेराव और उच्चाधिकारियों तक डेलिगेशन भेजने की योजना बनाई जा रही है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन कब तक ग्रामीणों की इन वाजिब मांगों पर संज्ञान लेता है।


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