धौलपुर दौरा: सीएम भजनलाल शर्मा की घोषणाओं को कांग्रेस विधायक रोहित बोहरा ने बताया ‘पुराना दोहराव’
धौलपुर में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के हालिया दौरे के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। राजाखेड़ा से कांग्रेस विधायक रोहित बोहरा ने मुख्यमंत्री के दौरे को केवल ‘इवेंट मैनेजमेंट’ करार देते हुए दावा किया कि जिले को कोई नई बड़ी सौगात नहीं मिली है। बोहरा ने राजाखेड़ा पुल की मंजूरी का स्वागत तो किया, लेकिन अधिकांश अन्य घोषणाओं को पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के समय की स्वीकृत परियोजनाओं का ही दोहराव बताया है।
घोषणाओं और धरातल के बीच का अंतर
विधायक रोहित बोहरा ने आरोप लगाया कि धौलपुर के विकास के नाम पर केवल पुरानी घोषणाओं को ही नए सिरे से पेश किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों के लिए केवल घोषणाएं काफी नहीं हैं, उनके लिए बजट और भूमि आवंटन की ठोस प्रक्रिया जरूरी है। बोहरा ने उदाहरण देते हुए कहा कि राजाखेड़ा मंडी की घोषणा दो साल पहले ही हो चुकी थी, लेकिन आज तक न तो जमीन आवंटित हुई और न ही पर्याप्त बजट जारी किया गया है।
- लोकार्पण पर सवाल: मुख्यमंत्री द्वारा किए गए कई लोकार्पण और शिलान्यास पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल में स्वीकृत या निर्माणाधीन थे।
- पार्वती बांध का मुद्दा: बांध के गेटों के रिनोवेशन पर चिंता जताते हुए विधायक ने मांग की कि निर्माण से पहले विस्तृत सर्वे हो, ताकि डूब क्षेत्र में आने वाले गांवों को बचाया जा सके।
- सरकारी संसाधनों का उपयोग: बोहरा ने आरोप लगाया कि कार्यक्रम में भीड़ जुटाने के लिए सरकारी मशीनरी और संसाधनों का दुरुपयोग किया गया है।
प्रमुख जनसमस्याओं पर सरकार को घेरा
विधायक ने धौलपुर की गंभीर बुनियादी समस्याओं को रेखांकित करते हुए सरकार से प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री का पूरा ध्यान केवल इवेंट तक सीमित रहा, जबकि धौलपुर शहर की वास्तविक चुनौतियां जस की तस बनी हुई हैं। बोहरा ने निम्नलिखित मुद्दों पर तत्काल ध्यान देने की बात कही है:
धौलपुर की प्राथमिकताएं:
- शहर में गहराता पेयजल संकट और जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान।
- शहर की जर्जर सड़कों का कायाकल्प।
- सरमथुरा क्षेत्र में अवैध खनन और उससे जुड़े स्थानीय मुद्दे।
आर्थिक स्थिति और क्रियान्वयन पर चिंता
कांग्रेस विधायक ने राज्य सरकार की वित्तीय स्थिति पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि एक ओर प्रदेश पर कर्ज का बोझ लगातार बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर स्वीकृत बजट का भी प्रभावी ढंग से उपयोग नहीं हो पा रहा है। बोहरा ने स्पष्ट किया कि सरकार को घोषणाओं की राजनीति से ऊपर उठकर योजनाओं के धरातल पर क्रियान्वयन और जनहित के कार्यों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।










