Chambal: अवैध रेत खनन पर रोक से बदली नदी की तस्वीर, CEC खुश

सुप्रीम कोर्ट द्वारा अवैध रेत उत्खनन के खिलाफ अपनाई गई सख्त नीति का सकारात्मक असर अब धरातल पर नजर आने लगा है। चंबल अभयारण्य क्षेत्र में माफियाओं पर नकेल कसने के बाद नदी धीरे-धीरे अपने प्राकृतिक गौरव को हासिल कर रही है। केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (CEC) के सदस्य चंद्रप्रकाश गोयल ने हाल ही में…

सुप्रीम कोर्ट की सख्ती का असर: चंबल नदी अब लौट रही है अपने पुराने स्वरूप में

सुप्रीम कोर्ट द्वारा अवैध रेत उत्खनन के खिलाफ अपनाई गई सख्त नीति का सकारात्मक असर अब धरातल पर नजर आने लगा है। चंबल अभयारण्य क्षेत्र में माफियाओं पर नकेल कसने के बाद नदी धीरे-धीरे अपने प्राकृतिक गौरव को हासिल कर रही है। केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (CEC) के सदस्य चंद्रप्रकाश गोयल ने हाल ही में मुरैना का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया और पाया कि नदी का पारिस्थितिक तंत्र अब सुधर रहा है।

देवरी घड़ियाल केंद्र पर उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक

CEC सदस्य चंद्रप्रकाश गोयल ने गुरुवार को देवरी घड़ियाल केंद्र पर मध्य प्रदेश और राजस्थान के वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण संयुक्त बैठक की। इस बैठक का मुख्य एजेंडा सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित करना और अवैध खनन को पूरी तरह जड़ से खत्म करना था। बैठक में दोनों राज्यों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर जोर दिया गया ताकि चंबल के संरक्षण को और मजबूती मिल सके।

बैठक में शामिल रहे प्रमुख अधिकारी

इस उच्च स्तरीय बैठक में दोनों राज्यों के आला अधिकारियों ने हिस्सा लिया, जिनमें प्रमुख रूप से निम्नलिखित शामिल थे:

  • मुरैना प्रशासन: कलेक्टर लोकेश कुमार जांगिड़, एसपी धर्मराज मीणा और डीएफओ हरिश्चंद बघेल।
  • धौलपुर प्रशासन: कलेक्टर श्रीनिधि बी.टी. और एसपी विकास सांगवान।
  • अन्य: चंबल संभाग के आयुक्त सुरेश कुमार सहित वन विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी।

राजघाट का निरीक्षण: अवैध खनन पर पूर्ण विराम

समीक्षा बैठक के बाद, चंद्रप्रकाश गोयल ने राजघाट समेत चंबल नदी के उन तमाम संवेदनशील घाटों का भौतिक निरीक्षण किया, जो कभी रेत माफियाओं का गढ़ माने जाते थे। निरीक्षण के दौरान कहीं भी अवैध गतिविधि नहीं पाई गई। अधिकारियों ने बताया कि निरंतर निगरानी और साझा अभियान के कारण खनन गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण बना हुआ है।

मई की तुलना में चंबल में आए सकारात्मक बदलाव

चंद्रप्रकाश गोयल ने स्पष्ट किया कि मई माह की स्थिति और आज की स्थिति में जमीन-आसमान का अंतर है। उन्होंने कहा, “मई में जब हमने स्थिति देखी थी, तो वह काफी चिंताजनक थी, लेकिन आज चंबल का प्राकृतिक प्रवाह और स्वरूप फिर से उभरता हुआ दिख रहा है। यह पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ी जीत है।”

भविष्य के लिए कड़े निर्देश और उम्मीद

सीईसी सदस्य ने जोर देकर कहा कि यदि मध्य प्रदेश और राजस्थान प्रशासन इसी तरह की सख्ती बरकरार रखते हैं, तो चंबल नदी बहुत जल्द अपने मूल अस्तित्व में लौट आएगी। इससे न केवल नदी का संतुलन सुधरेगा, बल्कि घड़ियाल, डॉल्फिन और कछुओं जैसे दुर्लभ जलीय जीवों का प्राकृतिक आवास भी सुरक्षित रहेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि भविष्य में भी निरंतर निगरानी और समन्वित कार्रवाई ही चंबल को माफियाओं से बचाने का एकमात्र रास्ता है।


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