Bilasapur: जर्जर स्कूल में जान जोखिम में डाल पढ़ाई कर रहे बच्चे

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले से एक चिंताजनक तस्वीर सामने आई है, जहां बन्नाकडीह चौक स्थित सरकारी प्राइमरी स्कूल के बच्चे अपनी जान जोखिम में डालकर शिक्षा ग्रहण करने को मजबूर हैं। साल 1956 से संचालित हो रहे इस स्कूल की इमारत अब बेहद जर्जर हो चुकी है। बारिश का मौसम शुरू होते ही स्कूल की…

बिलासपुर में जर्जर स्कूल: जान जोखिम में डालकर पढ़ने को मजबूर मासूम

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले से एक चिंताजनक तस्वीर सामने आई है, जहां बन्नाकडीह चौक स्थित सरकारी प्राइमरी स्कूल के बच्चे अपनी जान जोखिम में डालकर शिक्षा ग्रहण करने को मजबूर हैं। साल 1956 से संचालित हो रहे इस स्कूल की इमारत अब बेहद जर्जर हो चुकी है। बारिश का मौसम शुरू होते ही स्कूल की छत से पानी टपकने लगता है, जिससे न केवल बच्चों की पढ़ाई बाधित होती है, बल्कि उनके सुरक्षित रहने पर भी बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।

अपनी जान बचाने के लिए स्कूल प्रबंधन ने छत के नीचे हरा मेट (तिरपाल) लगाकर अस्थायी व्यवस्था की है, लेकिन यह नाकाफी साबित हो रही है। पानी लगातार कक्षा के भीतर गिर रहा है, जिससे कभी भी कोई बड़ा हादसा होने का डर बना हुआ है।

जिले में 288 स्कूल जर्जर, बच्चों का भविष्य खतरे में

बन्नाकडीह चौक स्कूल की स्थिति जिले के उन 288 जर्जर स्कूल भवनों का आईना है, जो आज भी मरम्मत की बाट जोह रहे हैं। हाल ही में जिले के एक अन्य स्कूल में बच्चों के पेड़ के नीचे बैठकर पढ़ाई करने का मामला भी सामने आया था, जो शिक्षा व्यवस्था की बदहाली को दर्शाता है।

विवरण आंकड़े/स्थिति
चिन्हित जर्जर स्कूल 288 भवन
प्रमुख समस्या छत से पानी टपकना और सुरक्षा का अभाव
अस्थायी राहत तिरपाल या मेट लगाकर काम चलाना

हाईकोर्ट की सख्ती और प्रशासन की जवाबदेही

जर्जर स्कूलों के मामले पर पिछले साल छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया था। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने शासन और स्कूल शिक्षा सचिव को तलब कर मरम्मत की प्रोग्रेस रिपोर्ट मांगी थी। कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा था कि केवल कलेक्टर को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं है, बल्कि शिक्षा सचिव को भी अपनी जवाबदेही सुनिश्चित करनी होगी।

  • प्रशासन का दावा: हर साल बारिश से पहले मरम्मत और नए भवनों के निर्माण का वादा किया जाता है।
  • हकीकत: दावों के बावजूद कई स्कूलों में बच्चे जर्जर कमरों में बैठने को मजबूर हैं।
  • कलेक्टर के निर्देश: कलेक्टर संजय अग्रवाल ने सख्त लहजे में कहा है कि किसी भी स्थिति में जर्जर भवनों में कक्षाएं संचालित न की जाएं और बच्चों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जाए।

कलेक्टर संजय अग्रवाल ने कहा कि स्कूलों के जीर्णोद्धार का कार्य प्राथमिकता के आधार पर किया जा रहा है और आवश्यकतानुसार बजट भी आवंटित किया गया है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन कब तक इन मासूमों को सुरक्षित छत मुहैया करा पाता है।


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