खंडवा वन वृत्त में प्रमोशन सूची पर विवाद: आरक्षण नियमों की अनदेखी के आरोप से मचा हड़कंप
मध्य प्रदेश के निमाड़ क्षेत्र में वन विभाग द्वारा जारी की गई पदोन्नति सूची इन दिनों विवादों के केंद्र में है। खंडवा वन वृत्त के अंतर्गत चार जिलों में 333 कर्मचारियों की पदोन्नति के बाद, आरक्षित वर्ग के कर्मचारियों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। दावा किया जा रहा है कि सीसीएफ स्तर पर हुई इस प्रक्रिया में आरक्षण नियमों का उल्लंघन किया गया है। नाराज वनकर्मियों का कहना है कि अनारक्षित कोटे का लाभ केवल सामान्य और ओबीसी वर्ग को देकर एसटी-एससी श्रेणी के वरिष्ठ कर्मचारियों को उनके हक से वंचित रखा गया है। इस पूरे मामले में अब विभागीय जांच की मांग तेज हो गई है।
नियमों की अनदेखी और पक्षपात के आरोप
वनकर्मियों के संगठनों का तर्क है कि मध्य प्रदेश लोक सेवा (पदोन्नति) नियम, 2025 और हाईकोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद खंडवा वन वृत्त में नियमों की मनमानी व्याख्या की गई। प्रभावित कर्मचारियों के अनुसार:
- प्रदेश की 16 में से 14 कंजरवेंसी में नियमों का सही पालन हुआ, लेकिन केवल खंडवा में वरिष्ठता को नजरअंदाज किया गया।
- आरक्षित वर्ग के करीब 80 वरिष्ठ कर्मचारी अब अपने से 10-12 साल जूनियर अधिकारियों के अधीन कार्य करने को मजबूर हो सकते हैं।
- बैतूल वन वृत्त का उदाहरण देते हुए कर्मचारियों ने मांग की है कि खंडवा में भी उसी पारदर्शी प्रक्रिया को अपनाया जाना चाहिए।
पदोन्नति से वंचित कर्मचारियों का दर्द
दैनिक भास्कर की पड़ताल में सामने आया है कि 2003 और 2005 बैच के कई अनुभवी वनकर्मी इस प्रक्रिया से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। पदोन्नति से वंचित रहे कर्मचारियों की व्यथा कुछ इस प्रकार है:
अनोखीलाल सिलवे (कार्यवाहक वनपाल): 18 साल की सेवा के बाद मिले ‘स्टार’ (पद) के छिनने का डर सता रहा है। उनका कहना है कि 20 प्रतिशत एसटी और 16 प्रतिशत एससी आरक्षण के बाद शेष पदों पर वरिष्ठता के आधार पर सभी वर्गों को मौका मिलना चाहिए था।
बलवनसिंह सोलंकी (वनरक्षक): 21 साल की सेवा के बावजूद पदोन्नति न मिलना दुर्भाग्यपूर्ण है। बिना किसी विभागीय जांच के, 2012 बैच के कर्मचारियों को आगे बढ़ाना वरिष्ठता के सिद्धांत के खिलाफ है।
मुकेश चौहान (वनरक्षक): इनके अनुसार, खंडवा, बुरहानपुर, बड़वानी और खरगोन में नियमों का उल्लंघन कर करीब 100 एसटी वर्ग के कर्मचारियों को प्रमोशन से दूर रखा गया है, जो कि न्यायसंगत नहीं है।
विभागीय रुख: क्या सुधरेगी स्थिति?
इस पूरे मामले पर खंडवा के डीएफओ राकेश कुमार डामोर ने स्वीकार किया है कि पदोन्नति प्रक्रिया के दौरान समितियों से कुछ तकनीकी त्रुटियां हुई हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि नियमानुसार आपत्ति दर्ज कराने के लिए 15 दिन का समय दिया गया है। डीएफओ ने भरोसा दिलाया है कि शिकायतों की गंभीरता को देखते हुए मौजूदा सूची की समीक्षा की जा रही है और जल्द ही संशोधित (नई) सूची जारी की जाएगी ताकि किसी भी पात्र कर्मचारी के साथ अन्याय न हो।










