खंडवा का जावर मॉडल: पारंपरिक खेती को छोड़ अपना रहे आधुनिक तकनीक, दुबई तक पहुंच रही सब्जियां
मध्य प्रदेश के खंडवा जिले का जावर गांव इन दिनों पूरे प्रदेश के किसानों के लिए एक नजीर बन चुका है। यहां के किसानों ने पारंपरिक खेती की लीक से हटकर उद्यानिकी फसलों को अपनाया है, जिससे न केवल उनकी आय में कई गुना वृद्धि हुई है, बल्कि उनका नेटवर्क देश की सीमाओं को पार कर दुबई तक फैल गया है। महज दो एकड़ से शुरू हुई यह शुरुआत आज 160 किसानों के एक मजबूत एफपीओ (किसान उत्पादक संगठन) में तब्दील हो गई है।
कलेक्टर ने किया खेतों का निरीक्षण
शुक्रवार को खंडवा कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने जावर गांव पहुंचकर प्रगतिशील किसान अश्विन सावले के खेतों का दौरा किया। इस दौरान उनके साथ अपर कलेक्टर सृष्टि देशमुख गौड़ा और कृषि व उद्यानिकी विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे। कलेक्टर ने वहां ड्रिप सिंचाई, मल्चिंग और स्प्रिंकलर जैसी आधुनिक तकनीकों के उपयोग को करीब से देखा और इस मॉडल की सराहना की। उन्होंने कहा कि जावर के किसानों ने खेती को एक मुनाफे वाला व्यवसाय बना दिया है।
पारंपरिक खेती बनाम उद्यानिकी: कमाई का बड़ा अंतर
कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि सोयाबीन जैसी पारंपरिक फसलों की तुलना में उद्यानिकी खेती किसानों की आर्थिक स्थिति बदलने में सक्षम है। इसे समझने के लिए नीचे दी गई तालिका देखें:
| फसल का प्रकार | प्रति एकड़ औसत आय |
|---|---|
| सोयाबीन (पारंपरिक) | लगभग 30 हजार रुपये |
| खीरा और टमाटर (आधुनिक) | 4 लाख रुपये से अधिक |
400 एकड़ में फैला बदलाव का कारवां
प्रगतिशील किसान अश्विन सावले ने चार साल पहले मात्र दो एकड़ भूमि से खीरा और टमाटर की खेती शुरू की थी। आज उनके साथ 160 किसान जुड़ चुके हैं और कुल 400 एकड़ भूमि पर सब्जियों का उत्पादन किया जा रहा है। अश्विन बताते हैं कि उनके खेत की सब्जियां मुंबई, दिल्ली, लखनऊ, लुधियाना और नोएडा जैसे बड़े शहरों में भेजी जा रही हैं। यही नहीं, उनके द्वारा उत्पादित टमाटर की गुणवत्ता इतनी बेहतर है कि वे मुंबई के निर्यातकों के माध्यम से दुबई तक भेजे जाते हैं।
सोलर ड्रायर से वैल्यू एडिशन का कमाल
बाजार में सब्जियों के दाम गिरने पर नुकसान से बचने के लिए किसानों ने सोलर ड्रायर तकनीक का सहारा लिया है। अश्विन सावले के फार्म हाउस पर लगे 6 सोलर ड्रायर के जरिए टमाटर, करेला, मिर्च और नींबू को प्रोसेस किया जाता है। इस ‘वैल्यू एडिशन’ प्रक्रिया से न केवल फसल खराब होने से बचती है, बल्कि बाजार में इनकी मांग भी बढ़ जाती है।
किसानों के लिए प्रशासन का संदेश
- तकनीकी अपनाएं: ड्रिप सिंचाई और मल्चिंग से लागत कम और उत्पादन अधिक होता है।
- संगठित हों: एफपीओ (FPO) बनाकर किसान अपनी उपज का बेहतर मोल प्राप्त कर सकते हैं।
- प्रशासन का सहयोग: कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने आश्वस्त किया कि जिला प्रशासन किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन और हर संभव सहायता प्रदान करेगा।
जावर गांव का यह ‘उद्यानिकी मॉडल’ साबित करता है कि यदि सही दिशा, आधुनिक तकनीक और सामूहिक प्रयास मिल जाएं, तो छोटे किसान भी अपनी किस्मत बदल सकते हैं और देश की अर्थव्यवस्था में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।










