Tractor जब्त होने के 6 दिन बाद भी कार्रवाई क्यों नहीं, सिंगरौली में मचा बवाल


मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले में अवैध खनन और परिवहन के खिलाफ प्रशासन की सुस्त कार्यप्रणाली एक बार फिर सुर्खियों में है। बरगवां तहसील के पचौर क्षेत्र में अवैध रेत ले जाते हुए पकड़े गए दो ट्रैक्टरों को जब्त किए हुए 6 दिन का लंबा समय बीत चुका है, लेकिन अब तक कोई भी ठोस…

सिंगरौली में अवैध रेत परिवहन पर कार्रवाई ठंडे बस्ते में, 6 दिन बाद भी नहीं हुई एफआईआर

मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले में अवैध खनन और परिवहन के खिलाफ प्रशासन की सुस्त कार्यप्रणाली एक बार फिर सुर्खियों में है। बरगवां तहसील के पचौर क्षेत्र में अवैध रेत ले जाते हुए पकड़े गए दो ट्रैक्टरों को जब्त किए हुए 6 दिन का लंबा समय बीत चुका है, लेकिन अब तक कोई भी ठोस वैधानिक कार्रवाई नहीं की गई है। ये दोनों वाहन वर्तमान में बरगवां थाना परिसर की शोभा बढ़ा रहे हैं, जबकि जिम्मेदार अधिकारी मामले से पल्ला झाड़ते नजर आ रहे हैं।

प्रशासनिक लापरवाही पर उठे गंभीर सवाल

स्थानीय निवासियों और जागरूक नागरिकों का आरोप है कि इतनी बड़ी कार्रवाई के बाद भी खनिज विभाग को सूचित न करना बड़ी प्रशासनिक चूक है। नियमानुसार, अवैध खनन या परिवहन के मामलों में तत्काल खनिज विभाग को सूचित कर जुर्माना और कानूनी प्रक्रिया शुरू की जानी चाहिए थी। इस देरी ने स्थानीय स्तर पर अधिकारियों की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगा दिए हैं:

  • नायब तहसीलदार द्वारा की गई जब्ती के बाद भी फाइलों का आगे न बढ़ना संदेहास्पद है।
  • खनिज विभाग को अंधेरे में रखना विभागीय समन्वय की कमी को दर्शाता है।
  • लंबे समय तक जब्त वाहनों पर कोई ठोस कानूनी कदम न उठाना भ्रष्टाचार की संभावनाओं को जन्म देता है।

अधिकारियों का टालमटोल रवैया

मिली जानकारी के अनुसार, नायब तहसीलदार दिनेश पनिका ने जनसुनवाई से लौटते समय अवैध रेत से लदे तीन ट्रैक्टरों को पकड़ा था, जिनमें से दो को जब्त कर थाने के सुपुर्द कर दिया गया था। जब इस मामले में जवाबदेही तय करने की कोशिश की गई, तो अधिकारियों के बयान हैरान करने वाले रहे:

बरगवां थाना प्रभारी अनिल पटेल का कहना है कि ट्रैक्टर उनके परिसर में खड़े हैं, लेकिन आगे की कार्रवाई से उनका कोई लेना-देना नहीं है। वहीं, देवसर के एसडीएम सौरभ मिश्रा ने स्वीकार किया कि उन्हें जब्ती की जानकारी है, लेकिन वर्तमान स्थिति और कार्रवाई की प्रगति पर उन्होंने चुप्पी साध ली और जानकारी जुटाने का हवाला देकर पल्ला झाड़ लिया।

क्या कार्रवाई की उम्मीद है?

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अवैध रेत परिवहन जैसे गंभीर मामलों में पुलिस और राजस्व विभाग इसी तरह की शिथिलता बरतते रहे, तो माफियाओं के हौसले बुलंद होंगे। फिलहाल, जनता अब जिला प्रशासन के उच्च अधिकारियों से इस मामले में हस्तक्षेप की मांग कर रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि 6 दिनों तक इन वाहनों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई और इसके पीछे किसका संरक्षण है।