MP: साइबर ठगी का सबसे बड़ा मामला, CA से 21 करोड़ की धोखाधड़ी

मध्य प्रदेश के ग्वालियर में साइबर अपराध का एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने पूरे प्रशासनिक तंत्र को हिलाकर रख दिया है। यह राज्य के इतिहास में अब तक की सबसे बड़ी ऑनलाइन धोखाधड़ी मानी जा रही है। शहर के एक प्रतिष्ठित 70 वर्षीय चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) और चैंबर ऑफ कॉमर्स के चुनाव अधिकारी…

ग्वालियर में अब तक की सबसे बड़ी साइबर ठगी: सीए से 21 करोड़ की धोखाधड़ी, ट्रेडिंग के नाम पर बिछाया जाल

मध्य प्रदेश के ग्वालियर में साइबर अपराध का एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने पूरे प्रशासनिक तंत्र को हिलाकर रख दिया है। यह राज्य के इतिहास में अब तक की सबसे बड़ी ऑनलाइन धोखाधड़ी मानी जा रही है। शहर के एक प्रतिष्ठित 70 वर्षीय चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) और चैंबर ऑफ कॉमर्स के चुनाव अधिकारी अशोक विजयवर्गीय को शातिर ठगों ने अपना शिकार बनाया है। आरोपियों ने क्रिप्टो निवेश और ऑनलाइन ट्रेडिंग में मोटा मुनाफा कमाने का झांसा देकर उनसे कुल 21 करोड़ 05 लाख 96 हजार रुपये की भारी-भरकम राशि ऐंठ ली।

इस पूरी वारदात की पटकथा बेहद सुनियोजित तरीके से लिखी गई थी। ठगों ने पीड़ित का भरोसा जीतने के लिए शुरुआत में उन्हें छोटा निवेश करने को कहा और बदले में तुरंत मुनाफा लौटाया। जब सीए का विश्वास पूरी तरह जम गया, तो ठगों ने निवेश की राशि को धीरे-धीरे बढ़ाना शुरू कर दिया। 218 दिनों तक चले इस लंबे खेल में पीड़ित को एक फर्जी ट्रेडिंग वेबसाइट दिखाई जाती रही, जिसमें उनका निवेश करोड़ों में बढ़ता हुआ दिख रहा था, जबकि हकीकत में वे अपनी जमा-पूंजी गंवा रहे थे।

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कैसे दिया गया 21 करोड़ की डिजिटल डकैती को अंजाम?

  • शुरुआती लालच: ठगों ने पहले 1 लाख रुपये निवेश करवाए और विश्वास के लिए 88 हजार रुपये का मुनाफा भी वापस दिया।
  • लंबा जाल: 1 दिसंबर 2025 से 7 जुलाई 2026 तक, यानी कुल 218 दिनों तक पीड़ित को मानसिक रूप से भ्रमित रखा गया।
  • 106 ट्रांजैक्शन: ठगों ने अलग-अलग समय पर 106 बार में पैसे ट्रांसफर करवाए, जो देश के 25 से अधिक बैंक खातों में गए।
  • फर्जी पोर्टफोलियो: पीड़ित को वेबसाइट पर 33.25 करोड़ रुपये का पोर्टफोलियो दिखाया जा रहा था, जो पूरी तरह से फर्जी था।

निकासी के समय हुआ असली खेल का खुलासा

जब पीड़ित सीए ने अपने मुनाफे की रकम को बैंक खाते में वापस लेने (Withdraw) का प्रयास किया, तो ठगों का असली चेहरा सामने आ गया। जालसाजों ने पैसे रिलीज करने के बदले में टैक्स, प्रोसेसिंग फीस और अन्य शुल्कों के नाम पर और भी करोड़ों रुपयों की मांग शुरू कर दी। तब जाकर पीड़ित को समझ आया कि उनके साथ बहुत बड़ी धोखाधड़ी हुई है। फिलहाल, इस सनसनीखेज मामले की जांच साइबर पुलिस द्वारा की जा रही है और देश भर के उन 25 बैंक खातों की पड़ताल की जा रही है, जिनमें यह पैसा ट्रांसफर किया गया था।