मध्य प्रदेश में मंदिरों की संपत्ति पर भू-माफियाओं का कब्जा: फर्जी वसीयत और सरकारी मिलीभगत से करोड़ों का घोटाला
अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के बाद देश भर में धार्मिक स्थलों की सुरक्षा को लेकर चर्चाएं तेज हैं, लेकिन मध्य प्रदेश के 7 प्रमुख जिलों में स्थिति बेहद चिंताजनक है। एक विशेष पड़ताल में यह खुलासा हुआ है कि सागर, दमोह, मुरैना, भिंड, शिवपुरी, टीकमगढ़ और नर्मदापुरम में मंदिरों की अकूत संपत्तियों को हड़पने का बड़ा खेल चल रहा है। हैरानी की बात यह है कि इन मंदिरों के संरक्षक के तौर पर प्रशासनिक अधिकारी (कलेक्टर या एसडीएम) नियुक्त हैं, फिर भी फर्जी दस्तावेजों और समितियों के जरिए अरबों की जमीनें और दान की राशि खुर्द-बुर्द की जा रही है।
प्रमुख जिलों में चल रहा संपत्ति का खेल
इन जिलों में मंदिरों की बेशकीमती जमीनों और चढ़ावे को लेकर जो अनियमितताएं सामने आई हैं, उनका ब्यौरा नीचे दी गई तालिका में देखा जा सकता है:
| जिला | मंदिर का नाम | मुख्य अनियमितता |
|---|---|---|
| दमोह | श्री देव जानकी रमण | 500 एकड़ जमीन हथियाने के लिए 3 फर्जी वसीयतें |
| मुरैना | बिहारी जी मंदिर | 47 लाख का किराया, लेकिन मंदिर को मिलते हैं केवल 60 हजार |
| नर्मदापुरम | राधाकृष्ण मंदिर | 66 लाख की फसल बेची, ऑडिट में केवल 27 लाख दिखाए |
| शिवपुरी | गरूड़ गोविंद मंदिर | 52 करोड़ की जमीन पर व्यावसायिक कब्जा |
| भिंड | गणेश मंदिर (गंज बाजार) | नोटरी के जरिए 150 बीघा जमीन बेची गई |
प्रशासन की भूमिका पर सवाल
दमोह के श्री देव जानकी रमण मंदिर की 500 एकड़ जमीन और करोड़ों की नीलम मूर्ति पर कब्जे के लिए तीन-तीन फर्जी वसीयतनामा तैयार कर लिए गए। वहीं, मुरैना के ऐतिहासिक बिहारी जी मंदिर की हालत तो और भी बदतर है। यहाँ 157 दुकानों का किराया 47 लाख होना चाहिए, लेकिन मंदिर को मात्र 60 हजार रुपये मिल रहे हैं। पिछले 13 वर्षों से मुख्य दानपेटी नहीं खोली गई है, जो प्रशासनिक उदासीनता का जीता-जागता प्रमाण है।
रिकॉर्ड गायब करने और हेराफेरी का सिलसिला
- सागर: गढ़पहरा मंदिर मामले में मुख्य फाइल ही गायब कर दी गई, ताकि जांच आगे न बढ़ सके।
- टीकमगढ़: ओरछा के श्री रामराजा सरकार मंदिर के खजाने से सोने-चांदी के आभूषण गायब होने का मामला सामने आया था, जिसकी जांच 9 साल बाद भी अधूरी है।
- नर्मदापुरम: ई-उपार्जन पोर्टल के आंकड़ों और ऑडिट रिपोर्ट में भारी अंतर मिला है, जिससे साफ है कि करोड़ों का मुनाफा निजी जेबों में जा रहा है।
- भिंड: गोहद में 20 करोड़ की कीमत वाली 150 बीघा जमीन को नोटरी के जरिए बेच दिया गया और अब वहां पक्के मकान बन चुके हैं।
मंत्रालय का पक्ष
इस पूरे मामले पर धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व राज्य मंत्री धर्मेंद्र भाव सिंह लोधी का कहना है कि अधिकांश ट्रस्टों के अध्यक्ष कलेक्टर ही होते हैं। उन्होंने आश्वासन दिया है कि यदि कोई विशेष शिकायत प्राप्त होती है, तो संबंधित कलेक्टर को तत्काल जांच और सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए जाएंगे। हालांकि, जमीनी हकीकत यह है कि सरकारी संरक्षण के बावजूद मंदिरों की संपत्ति लगातार कम होती जा रही है, जो एक गंभीर जांच का विषय है।
