डिंडोरी: आदिवासी छात्रावास में बदहाली का आरोप, छात्रों ने परोसे जा रहे भोजन पर उठाए सवाल
मध्य प्रदेश के डिंडोरी जिले स्थित राजा शंकर शाह-रघुनाथ शाह आदिवासी सीनियर छात्रावास इन दिनों चर्चा में है। यहां रहने वाले छात्रों ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। छात्रों का दावा है कि छात्रावास में उन्हें जो भोजन दिया जा रहा है, वह न केवल अस्वच्छ है बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी हानिकारक है। छात्रों के अनुसार, मेनू के मुताबिक भोजन कभी नहीं मिलता और साफ-सफाई की स्थिति भी बेहद दयनीय बनी हुई है।
कीड़े वाला चावल और सड़ी सब्जियां: छात्रों का दर्द
छात्रावास में रहने वाले छात्र उमेंद्र कुमार धुर्वे ने अपनी व्यथा साझा करते हुए बताया कि उन्हें परोसे जाने वाले चावल में अक्सर कीड़े निकलते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि रसोइयों द्वारा सब्जी बनाने में सड़े हुए आलू का इस्तेमाल किया जा रहा है। छात्रों की प्रमुख समस्याएं निम्नलिखित हैं:
- भोजन की गुणवत्ता: निर्धारित मेनू का पालन नहीं होता और अक्सर खराब गुणवत्ता का राशन इस्तेमाल किया जाता है।
- स्वच्छता का अभाव: छात्रावास के शौचालयों की नियमित सफाई नहीं होती, जिससे संक्रमण का खतरा बना रहता है।
- दिखावटी व्यवस्था: छात्रों का कहना है कि जब भी किसी वरिष्ठ अधिकारी के निरीक्षण की सूचना मिलती है, तो रातों-रात व्यवस्थाएं सुधार दी जाती हैं, जो निरीक्षण के बाद फिर पहले जैसी हो जाती हैं।
अधीक्षक ने आरोपों को नकारा, बताई क्षमता से अधिक छात्रों की समस्या
छात्रों के इन गंभीर आरोपों पर छात्रावास के अधीक्षक राजेश चौरे ने अपना पक्ष रखा है। उन्होंने भोजन की गुणवत्ता खराब होने की बात को सिरे से खारिज कर दिया। उनका कहना है कि छात्रों को पूरी तरह से पौष्टिक और गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। हालांकि, उन्होंने छात्रावास में मौजूद कुछ वास्तविक चुनौतियों को जरूर स्वीकार किया है:
अधीक्षक चौरे ने बताया कि 50 सीटों की निर्धारित क्षमता वाले इस छात्रावास में वर्तमान में 100 से अधिक छात्र रह रहे हैं। क्षमता से दोगुने छात्रों के रहने के कारण संसाधनों पर भारी दबाव है, जिसका असर व्यवस्थाओं पर पड़ रहा है। इसके अलावा, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भवन में वर्तमान में मरम्मत कार्य चल रहा है और पानी की समस्या को दूर करने के प्रयास किए जा रहे हैं।









